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Aamad-e-Mustafa Marhaba Marhaba

Written by Muhammad Ilyas Attar Qadri

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आमद-ए-मुस्तफ़ा मरहबा मरहबा, अहमद-ए-मुज्तबा मरहबा मरहबा या शफी-उल-वरा मरहबा मरहबा, ख़ातम-ुल-अम्बिया मरहबा मरहबा या रसूल-ए-ख़ुदा मरहबा मरहबा, जान तुम पर फ़िदा मरहबा मरहबा आए शम्स-उज़-दुहा मरहबा मरहबा, शाह-ए-बद्र-उद-दुजा मरहबा मरहबा आए नूर-ुल-हुदा मरहबा मरहबा, शाह-ए-ख़ैर-ुल-वरा मरहबा मरहबा आए मुश्किल कुशा मरहबा मरहबा, मेरे हाजत रवां मरहबा मरहबा रहबर-ओ-रहनुमा मरहबा मरहबा, शाह-ए-हर-दो-सरा मरहबा मरहबा रहमत-ए-किब्रिया मरहबा मरहबा, शाह-ए-अर्ज़-ओ-समा मरहबा मरहबा या हबीब-ए-ख़ुदा मरहबा मरहबा, सय्यद-ुल-अत़किया मरहबा मरहबा राहत-ए-आमना मरहबा मरहबा, वालिद-ए-फ़ातिमा मरहबा मरहबा आए सद्र-ुल-उला मरहबा मरहबा, सब लगाओ सदा मरहबा मरहबा ऐ सिराज-ए-मुनीर ऐ अलीम-ओ-ख़बीर, सरवर-ए-अम्बिया मरहबा मरहबा आमना के यहाँ शाह-ए-कौन-ओ-मकां, आए ग़ुल पड़ गया मरहबा मरहबा सर पे ताज-ए-शफ़ाअत है जिन के वो आज, आ गए मरहबा मरहबा आए प्यारे नबी हर तरफ़ थी ख़ुशी, चारसू शोर था मरहबा मरहबा ठंडी ठंडी हवा महकी महकी फ़ज़ा गुनगुनाती सवा मरहबा मरहबा फूल खिलने लगे नात कहने लगे हर शजर झूम उठा मरहबा मरहबा अब्र-ए-रहमत उठा और बरसने लगा कैफ़ सा छा गया मरहबा मरहबा चार सू चाँदनी हर तरफ़ रोशनी जाबजा नूर था मरहबा मरहबा थी हवा मुश्कबार आई हर सू बहार निखरी निखरी फ़ज़ा मरहबा मरहबा वाइज़-ए-खुश बयां का हर नात ख़्वां कहता है कहता है मरहबा मरहबा है बड़ा मर्तबा माह-ए-मीलाद का इस में क्या शक भला मरहबा मरहबा मुँह से उजाला हुआ बोल बाला हुआ हर मुसलमां का मरहबा मरहबा हर सनम आगर पड़ा काबा कहने लगा आ गए मुस्तफ़ा मरहबा मरहबा दूर अंधेरा हुआ लो सवेरा हुआ आ गए मुस्तफ़ा मरहबा मरहबा धूम सल्ल-ए-अला की मची चार सू आ गए मुस्तफ़ा मरहबा मरहबा बे-क़रारो सुनो दिल फ़गारो सुनो आ गए मुस्तफ़ा मरहबा मरहबा मुर्ग़ज़ारो सुनो रेगज़ारो सुनो आ गए मुस्तफ़ा मरहबा मरहबा गुल-ए-इज़ारो सुनो माह-ए-पारो सुनो आ गए मुस्तफ़ा मरहबा मरहबा शानदारो सुनो जानदारो सुनो आ गए मुस्तफ़ा मरहबा मरहबा ऐ दुलारो सुनो मेरे प्यारो सुनो आ गए मुस्तफ़ा मरहबा मरहबा मेरे यारो सुनो दोस्त-दारो सुनो आ गए मुस्तफ़ा मरहबा मरहबा आबशारो सुनो तेज़ धारो सुनो आ गए मुस्तफ़ा मरहबा मरहबा शाह-सवारो सुनो ख़ार-ज़ारो सुनो आ गए मुस्तफ़ा मरहबा मरहबा ऐ बहारो सुनो तुम नज़ारों सुनो आ गए मुस्तफ़ा मरहबा मरहबा चाँद तारो सुनो तुम भी ग़ारो सुनो आ गए मुस्तफ़ा मरहबा मरहबा लाला ज़ारो सुनो तुम बहारो सुनो आ गए मुस्तफ़ा मरहबा मरहबा ताजदारो सुनो मालदारो सुनो आ गए मुस्तफ़ा मरहबा मरहबा ऐ कहारो सुनो तुम सतारो सुनो आ गए मुस्तफ़ा मरहबा मरहबा होनहारो सुनो होशियारो सुनो आ गए मुस्तफ़ा मरहबा मरहबा राज़-दारो सुनो रोज़ा-दारो सुनो आ गए मुस्तफ़ा मरहबा मरहबा कामदारो सुनो कामगारो सुनो आ गए मुस्तफ़ा मरहबा मरहबा शाह-सवारो सुनो नामदारो सुनो आ गए मुस्तफ़ा मरहबा मरहबा ईद-ए-मीलाद है किस क़दर शाद है क़ल्ब-ए-अत्तार का मरहबा मरहबा