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Gyarhween Shareef Ke Naarey

Written by Muhammad Ilyas Attar Qadri

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सुल्तान-ए-विलायत वलियों पे हुकूमत शहबाज़-ए-ख़िताबत फ़ानूस-ए-हिदायत सरताज-ए-शरीअत हैं रब की नेअमत अल्लाह की रहमत हैं बाइस-ए-बरकत हैं साहिब-ए-इज़्ज़त हैं बहर-ए-सख़ावत दरया-ए-करामत फ़र्माओ हिमायत टल जाए मुसीबत सरापा शराफ़त हैं मख़ज़न-ए-अज़मत जवाब: ग़ौस-ए-पाक ऐ माह-ए-विलायत ग़ौस-ए-पाक हो हम पे इनायत ग़ौस-ए-पाक कमज़ोर की ताक़त ग़ौस-ए-पाक मजबूर की राहत ग़ौस-ए-पाक हो मेरी शफ़ाअत ग़ौस-ए-पाक दिलवाएं जन्नत ग़ौस-ए-पाक दो शौक़-ए-इबादत ग़ौस-ए-पाक दो ज़ौक़-ए-तिलावत ग़ौस-ए-पाक इसयां से हो नफ़रत ग़ौस-ए-पाक नेकी की दो उल्फ़त ग़ौस-ए-पाक दो बदियों से नफ़रत ग़ौस-ए-पाक सरकार की उल्फ़त ग़ौस-ए-पाक दो अपनी मोहब्बत ग़ौस-ए-पाक बे-कस की हिमायत ग़ौस-ए-पाक बे-बस की हैं राहत ग़ौस-ए-पाक हो दूर ये फ़ुरक़त ग़ौस-ए-पाक दे तुझे क़ुर्बत ग़ौस-ए-पाक मिस्कीन की दौलत ग़ौस-ए-पाक मोहताज की सरवत ग़ौस-ए-पाक वो आप की हैबत ग़ौस-ए-पाक जिनों पे हुकूमत ग़ौस-ए-पाक दो दीद का शरबत ग़ौस-ए-पाक मैं कर लूँ ज़ियारत ग़ौस-ए-पाक दे दो ये सआदत ग़ौस-ए-पाक मैं देख लूँ तुर्बत ग़ौस-ए-पाक जब हो मेरी रिहलत ग़ौस-ए-पाक देखूँ तेरी सूरत ग़ौस-ए-पाक दो जज़्बा-ए-ख़िदमत ग़ौस-ए-पाक दूँ नेकी की दावत ग़ौस-ए-पाक मरहबा या ग़ौस-ए-पाक मरहबा या ग़ौस-ए-पाक