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Hadaiq-e-Bakhshish Hissa Dom

Written by Imam Ahmad Raza Khan Qadri

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हदाइक़-ए-बख़्शिश १३२५ हिजरी हिस्सा दोम अला या अय्युहस साक़ी अदि रकासन व नाविल्हा के बर याद-ए-शिश-ए-कौसर बना साज़िम महफ़िल हा बला बारीद हुब-ए-शेख़-ए-नज्दी बर वहाबिया के इश्क़ आसाँ नमूद अव्वल व ले अफ़ताद मुश्किल हा वहाबी गरचह इख़फ़ा मी कुनंद बुग़्ज़-ए-नबी लेकिन निहाँ के मानद आँ राज़े के रू साज़ंद महफ़िल हा तुहुब-गाह-ए-मुल्क-ए-हिंद इक़ामत रा नमी शायद बजुरस फ़र्याद मी दारद के बर बंदिद महमिल हा सला-ए-मजलिज़म दर गोश आमद बिया बिशु जुरस मस्ताना मी गोयद के बर बंदिद महमिल हा मगर्दां रू अज़ीं महफ़िल रह-ए-अरबाब-ए-सुन्नत रो के सालिक बे-ख़बर नबूद ज़ी राह ओ रस्म-ए-मंज़िल हा दर ईं जल्वत बिया अज़ राह-ए-ख़ल्वत ता ख़ुदा याबी मता मा तलक़ा मन तहवा दइद्दुनया व अमहिलहा दिलम क़ुर्बानत ऐ दूद-ए-चराग़-ए-महफ़िल-ए-मौलिद ज़-ताब-ए-जअद-ए-मुश्कीं त चे ख़ूँ अफ़ताद दर दिल हा ग़रीक़-ए-बहर-ए-इश्क़-ए-अहमदिम अज़ फ़रहत-ए-मौलिद कजा दानंद हाल-ए-मा सुबकसारां साहिल हा रज़ा मस्त-ए-जाम-ए-इश्क़ साग़र बाज़ मी ख्वाहद अला या अय्युहस साक़ी अदि रकासन व नाविल्हा