इज़ने तैयबा अता कीजिये फिर करम मुस्तफ़ा कीजिये
फिर मदीने में आ जाएँ हम ऐसा एहसान शहा कीजिये
लो मदीना क़रीब आ गया ज़ायरो! आँख वा कीजिये
सब्ज़ गुम्बद पर ऐ ज़ायरो! जान अपनी फ़िदा कीजिये
दे के ग़म अपना दुनिया के हर रंज ओ ग़म की दवा कीजिये
रात दिन काश! रोया करूँ ऐसी रक़्क़त अता कीजिये
इक नज़र ही की तो बात है मस्त ओ बेखुद शहा कीजिये
कोई फेरा ग़रीबों के घर ख़ैर से सरवरा कीजिये
ज़ोर तूफ़ान है नाख़ुदा पार बेड़ा मेरा कीजिये
माहे मिलाद फिर आ गया ज़िक्र मिलाद का कीजिये
छेड़ना हो जो शैतान को उन का चर्चा किया कीजिये
अज़ पये शाहे कर्ब ओ बला दूर रंज ओ बला कीजिये
अपने क़दमों में मदफ़न अता या रसूल-ए-ख़ुदा कीजिये
क़ब्र में घुप अन्धेरा है आप आकर अब चाँदना कीजिये
प्यारे आक़ा ख़ज़ाना मुझे आँसुओं का अता कीजिये
हासदों से हसद का मरज़ दूर या मुस्तफ़ा कीजिये
सारे आदा का ख़ाना ख़राब या अली मुर्तज़ा कीजिये
दुश्मनों से न हरगिज़ डरूँ हौसला वो अता कीजिये
मेरे सारे मुहिब्बीन को जामे उल्फ़त अता कीजिये
जिस क़दर मेरे अहबाब हैं शाह! सब का भला कीजिये
आह! मुजरिम है मीज़ान पर पल्ला भारी मेरा कीजिये
पास हुस्ने अमल है कहाँ! लुत्फ़े शाहे वफ़ा कीजिये
आह! तारीकीए पुले सिरात! रहम शम्सुज़ुहा कीजिये
फ़र्दे जुर्म आह! आयद हुई अब शफ़ाअत शहा कीजिये
ले के दोज़ख़ मलाइक चले आप आकर रहा कीजिये
खाना जाये कहीं मुझ को आग रहम ओ लुत्फ़ ओ अता कीजिये
अब शफ़ाअत पये अहले बैत या शफ़ीउलवरा कीजिये
चार यारों का सदक़ा शहा ख़ुल्द में जा अता कीजिये
इज़्न, अत्तार को अब हुज़ूर हाज़िरी का अता कीजिये