मुझ पे चश्म-ए-करम कीजिए लुत्फ़-ए-शाह-ए-उमम कीजिए
अज़ तुफ़ैल-ए-बिलाल-ओ-रज़ा अब तो नज़र-ए-करम कीजिए
अज़ तुफ़ैल-ए-हुसैन-ओ-हसन दूर रंज-ओ-अलम कीजिए
काश! तैबा की हो हाज़िरी या नबी! अब करम कीजिए
अब बक़ी-ए-मुबारक अता ताजदार-ए-हरम कीजिए
सब्ज़ गुंबद का चमका वो नूर ज़ाइर-ए-सर को ख़ु म कीजिए
ज़िक्र-ए-सरकार का भाइयो! हर घड़ी दम-ब-दम कीजिए
दूर कर ज़माने के ग़म मरहमत अपना ग़म कीजिए
मेरा सीना मदीना बने मुझ पे ऐसा करम कीजिए
अब ख़ुदारा शफ़ाअत मेरी या शफ़ी-ए-उमम कीजिए
अज़ पये-ए-पीर-ओ-मुर्शद अता अपना ग़म चश्म-ए-नम कीजिए
आह! अत्तार बदकार है
लिल्लाह इस पर करम कीजिए