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Aagaye hain Mustafa salle ala khush amdeed

Written by Muhammad Ilyas Attar Qadri

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आगए हैं मुस्तफ़ा सल्ले अला ख़ुश आमदीद, हो गए जलवा नुमा सल्ले अला ख़ुश आमदीद सैयद ओ सरदार ए मा सल्ले अला ख़ुश आमदीद, राज़दार ए किब्रिया सल्ले अला ख़ुश आमदीद मालिक ओ मुख़्तार ए मा सल्ले अला ख़ुश आमदीद, नायब ए रब्बे आला सल्ले अला ख़ुश आमदीद गुमराही से लो बचा और सीधे रस्ते पर चला, ऐ हमारे रहनुमा सल्ले अला ख़ुश आमदीद मुस्कुराती फूल बरसाती हुई, गुनगुनाती है सबा सल्ले अला ख़ुश आमदीद बुलबुलें हैं नग्मा ख़्वां और पढ़ रही हैं क़ुमरियाँ, नात ए पाक ए मुस्तफ़ा सल्ले अला ख़ुश आमदीद सब्ज़ परचम चार सू लहरा रहे हैं जश्न है, आमद ए महबूब का सल्ले अला ख़ुश आमदीद ग़म ज़द ओ ग़म खाओ मत ऐ बे-सहारा उम्मत, आ गए मुश्किल कुशा सल्ले अला ख़ुश आमदीद झूम जाओ बे-कसो इमदाद करने आ गए, ख़ल्क़ के हाजत रवां सल्ले अला ख़ुश आमदीद बे-नवाओ आओ तुम, आओ गदाओ आओ तुम, सदक़ा ले लो नूर का सल्ले अला ख़ुश आमदीद आमना के घर पे चलते हैं सब अव्वल के साथ और लगाते हैं सदा सल्ले अला ख़ुश आमदीद बे-कसों के दाद रस ऐ ख़ल्क़ के फ़रियाद रस, दूर कर रंज ओ बला सल्ले अला ख़ुश आमदीद चश्म ए रहमत कीजिये अपनी मोहब्बत दीजिये, दर पे हाज़िर है गदा सल्ले अला ख़ुश आमदीद अपना ग़म दे दीजिये और चश्म ए नम दे दीजिये, दर पे हाज़िर है गदा सल्ले अला ख़ुश आमदीद दर्द ए इस्यां की दवा दो तुम शिफ़ा दो तुम शिफ़ा, दर पे हाज़िर है गदा सल्ले अला ख़ुश आमदीद गुंबद ए ख़ज़रा के जलवों से ये दिल आबाद हो, दर पे हाज़िर है गदा सल्ले अला ख़ुश आमदीद आप के क़दमों में आक़ा ख़ातिमा बिल-ख़ैर हो, दर पे हाज़िर है गदा सल्ले अला ख़ुश आमदीद अब बक़ी ए पाक में दो गज़ ज़मीं दे दीजिये, दर पे हाज़िर है गदा सल्ले अला ख़ुश आमदीद झूम कर हाँ झूम कर अत्तार लब को चूम कर मस्त हो कर दो सदा सल्ले अला ख़ुश आमदीद