Home/Muhammad Ilyas Attar Qadri/Aah! Ramadan ab ja raha hai haye tarpa ke Ramzan chala hai

आह! रमज़ान अब जा रहा है हाय तड़पा के रमज़ान चला है

Written by Muhammad Ilyas Attar Qadri

100%
आह! रमज़ान अब जा रहा है हाय तड़पा के रमज़ान चला है टुकड़े टुकड़े मेरा दिल हुआ है हाय तड़पा के रमज़ान चला है देख कर चांद में रो पड़ा था सामने हजर का ग़म खड़ा था जल्द रुख़सत का वक़्त आ गया है हाय तड़पा के रमज़ान चला है अश्क आंखों से अब बह रहे हैं हजर का ग़म जो हम सह रहे हैं वो दिल-ए-ग़मज़दा जानता है हाय तड़पा के रमज़ान चला है ग़म-ए-जुदाई का कैसे सहूं गा किस से ग़म का फ़साना कहूं गा आंख पुर-नम है दिल रो रहा है हाय तड़पा के रमज़ान चला है जां फ़िदा तुझ पे नाना-ए-हुसैन क़ल्ब है ग़मज़दा और बे-चैन दिल पे सदमा बढ़ा जा रहा है हाय तड़पा के रमज़ान चला है कर के तक़सीम बख़्शिश की असनाद आह! रंजीदा दिल कर के तू शाद सब को रोता हुआ छोड़ता है हाय तड़पा के रमज़ान चला है तू ये करना ख़ुदा से सिफ़ारिश इस गुनहगार की कर दे बख़्शिश तुझ से अत्तार की इल्तिजा है हाय तड़पा के रमज़ान चला है