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Aap Ki Nisbat Ae Nanaye Hussain

Written by Muhammad Ilyas Attar Qadri

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आप की निस्बत ऐ नाना-ए-हुसैन है बड़ी दौलत ऐ नाना-ए-हुसैन दूर कर फ़ुरक़त ऐ नाना-ए-हुसैन अपनी दे क़ुर्बत ऐ नाना-ए-हुसैन मर के भी निकले ना मेरे क़ल्ब से आप की उल्फ़त ऐ नाना-ए-हुसैन घर छूटे या सर कटे पर ना हो दीन की दौलत ऐ नाना-ए-हुसैन हूँ गुनाहों का मरीज़-ए-दाईमी दूर हो शामत ऐ नाना-ए-हुसैन वास्ता ग़ौस-ओ-रज़ा का दूर हो हर बुरी ख़सलत ऐ नाना-ए-हुसैन ग़म तुम्हारा चैन लेने ही ना दे दीद यह राहत ऐ नाना-ए-हुसैन अब मदीने में बुला कर दूर कर यह ग़म-ए-फ़ुरक़त ऐ नाना-ए-हुसैन सबज़ गुम्बद की बहारें देख लूँ आए वो साअत ऐ नाना-ए-हुसैन मौत सर पर आ गई कर दो अता दीद का शरबत ऐ नाना-ए-हुसैन अपने जलवों से अता फ़रमाइए नज़अ में राहत ऐ नाना-ए-हुसैन दो बक़ी-ए-पाक में दो गज़ ज़मीं तुम पए तुर्बत ऐ नाना-ए-हुसैन अज़ तुफ़ैल-ए-ग़ौस-ए-आज़म दूर हो क़ब्र की वहशत ऐ नाना-ए-हुसैन नार-ए-दोज़ख से बचा कर यानबी! दीजिए जन्नत ऐ नाना-ए-हुसैन हज़रत-ए-शब्बीर-ओ-शब्बर के तुफ़ैल टाल दो आफ़त ऐ नाना-ए-हुसैन आल से असहाब से क़ायम रहे ता-अबद निस्बत ऐ नाना-ए-हुसैन पीर ओ मुर्शिद पर मेरे माँ बाप पर, हो सदा रहमत ऐ नाना-ए-हुसैन हर तरफ 'नेकी की दावत' आम हो, नेक हो उम्मत ऐ नाना-ए-हुसैन सुन्नतों की हर तरफ आए बहार, नेक हो उम्मत ऐ नाना-ए-हुसैन खूब मदनी काफ़िलों की धूम हो, नेक हो उम्मत ऐ नाना-ए-हुसैन 'मदनी इनामात' की हो रेल पेल, नेक हो उम्मत ऐ नाना-ए-हुसैन नेकियों में दिल लगे हर दम, बना आमिल-ए-सुन्नत ऐ नाना-ए-हुसैन मैं गुनाहों से सदा बचता रहूँ, कीजिये रहमत ऐ नाना-ए-हुसैन झूठ से बुग्ज़ ओ हसद से हम बचें, कीजिये रहमत ऐ नाना-ए-हुसैन बदगुमानी, बदनिगाही से बचें, कीजिये रहमत ऐ नाना-ए-हुसैन दीजिये कुफ़्ल-ए-मदीना दीजिये, कीजिये रहमत ऐ नाना-ए-हुसैन दौलत-ए-इखलास हम को दीजिये, कीजिये रहमत ऐ नाना-ए-हुसैन कीजिये हज का शरफ़ मुझ को अता, कीजिये रहमत ऐ नाना-ए-हुसैन फिर तवाफ़-ए-ख़ाना-ए-काबा करूँ, कीजिये रहमत ऐ नाना-ए-हुसैन मैं मदीने का मुसाफ़िर अब बनूँ, कीजिये रहमत ऐ नाना-ए-हुसैन 'चल मदीना' की बशारत दीजिये, कीजिये रहमत ऐ नाना-ए-हुसैन अपना ग़म और चश्म-ए-नम दे दीजिये, कीजिये रहमत ऐ नाना-ए-हुसैन इश्क़ में आहें भरूँ, रोता रहूँ, कीजिये रहमत ऐ नाना-ए-हुसैन 'या रसूल अल्लाह उन्ज़ुर हालना', कीजिये रहमत ऐ नाना-ए-हुसैन 'या हबीब अल्लाह इस्मा' क़ालना', कीजिये रहमत ऐ नाना-ए-हुसैन 'इन्ननी फ़ी बहर-ए-हम्मिन मुग़रिक़ून', कीजिये रहमत ऐ नाना-ए-हुसैन 'ख़ुज़ यदी सहिल लना अशक़ालना', कीजिये रहमत ऐ नाना-ए-हुसैन इस्तक़ामत दीजिये इस्लाम पर, कीजिये रहमत ऐ नाना-ए-हुसैन दिल से दुनिया की हवस सब दूर हो, कीजिये रहमत ऐ नाना-ए-हुसैन नज़अ, क़ब्र ओ हश्र, मीज़ान हर जगह, कीजिये रहमत ऐ नाना-ए-हुसैन ऐब खुल जाएँ न महशर में कहीं, कीजिये रहमत ऐ नाना-ए-हुसैन अज़ तुफ़ैल-ए-चार यार-ए-बा-सफ़ा, कीजिये रहमत ऐ नाना-ए-हुसैन सदक़ा शहज़ादों का आक़ा कीजिये, कीजिये रहमत ऐ नाना-ए-हुसैन सब सहाबा का वसीला सय्यिदा, कीजिये रहमत ऐ नाना-ए-हुसैन गौस ओ ख़्वाजा और रज़ा का वास्ता, कीजिये रहमत ऐ नाना-ए-हुसैन मुरशिदी क़ुत्ब-ए-मदीना के तुफ़ैल, कीजिये रहमत ऐ नाना-ए-हुसैन 'दावत-ए-इस्लामी' वालों पर सदा, कीजिये रहमत ऐ नाना-ए-हुसैन हर वली का वास्ता अत्तार पर, कीजिये रहमत ऐ नाना-ए-हुसैन