ऐ मदीने के ताजदार सलाम
ऐ ग़रीबों के ग़मगुसार सलाम
तेरी इक इक अदा पर ऐ प्यारे
सौ दुरुदें फ़िदा हज़ार सलाम
रब्बि सल्लिम के कहने वाले पर
जान के साथ हूँ निसार सलाम
मेरे प्यारे पे मेरे आक़ा पर
मेरी जानिब से लाख बार सलाम
मेरी बिगड़ी बनाने वाले पर
भेज ऐ मेरे किरदार सलाम
उस पनाह-ए-गुनाहगारों पर
यह सलाम और करोड़ बार सलाम
उस जवाब-ए-सलाम के सदक़े
ता क़यामत हूँ बेशुमार सलाम
उनकी महफ़िल में साथ ले जाएँ
हसरत-ए-जान-ए-बेक़रार सलाम
पर्दा मेरा न फ़ाश हश्र में हो
ऐ मेरे हक़ के राज़दार सलाम
वो सलामत रहा क़यामत में
पढ़ लिए जिसने दिल से चार सलाम
अर्ज़ करता है यह हुस्न-ए-तेरा
तुझ पर ऐ ख़ुल्द की बहार सलाम
वो दूल्हा हैं सारी खुदाई बराती
उन्हीं के लिए है यह सामान-ए-आलम
न देखा कोई फूल तुझ सा न देखा
बहुत छान डाले गुलिस्तान-ए-आलम
तेरे कूचा की खाक ठहरी अज़ल से
मेरी जाँ इलाज-ए-मरीज़ान-ए-आलम
कोई जान-ए-ईसा को जा कर खबर दे
मरे जाते हैं दर्द मंदान-ए-आलम
अभी सारे बीमार होते हैं अच्छे
अगर लब हिला दे वो दरमान-ए-आलम
समीअन् खुदा रा हसन की भी सुन ले
बला में है यह लोथ दामान-ए-आलम