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अल्लाह अल्लाह के नबी से

Written by Imam Ahmad Raza Khan Qadri

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अल्लाह अल्लाह के नबी से फ़रियाद है नफ़्स की बदी से दिन भर खेलों में ख़ाक उड़ाई लाज आई न ज़र्रों की हंसी से शब भर सोने ही से ग़रज़ थी तारों ने हज़ार दांत पीसे ईमान पे मौत बेहतर ओ नफ़्स तेरी नापाक ज़िंदगी से ओ शहद नुमाये ज़हर-ए-दर-ए-जाम गुम जाऊं किधर तेरी बदी से गहरे प्यारे पुराने दिल सोज़ गुज़रा मैं तेरी दोस्ती से तुझ से जो उठाए मैं ने सदमे ऐसे न मिले कभी किसी से उफ़ रे ख़ुदकाम बे-मुरव्वत पड़ता है काम आदमी से तू ने ही किया ख़ुदा से नादिम तू ने ही किया ख़जिल नबी से कैसे आक़ा का हुक्म टाला हम मर मिटे तेरी ख़ुदसरी से आती न थी जब बदी भी तुझ को हम जानते हैं तुझे झी से हद के ज़ालिम सितम के कटर पत्थर शरमाएं तेरे जी से हम ख़ाक में मिल चुके हैं कब के निकला न ग़ुबार तेरे जी से है ज़ालिम! मैं निबाहूं तुझ से अल्लाह बचाए उस घड़ी से जो तुम को न जानता हो हज़रत चालें चले इस अजनबी से अल्लाह के सामने वो गन थे यारों में कैसे मुत्तक़ी से रहज़न ने लूट ली कमाई फ़रियाद है ख़िज़्र-ए-हाशमी से अल्लाह कुएं में ख़ुद गिरा हूं अपनी नालिश करूं तुझी से हैं पुश्त-ए-पनाह ग़ौस-ए-आज़म क्यों डरते हो तुम रज़ा किसी से