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Allah! Koi Hajj Ka Sabab Ab Tu Bana De

Written by Muhammad Ilyas Attar Qadri

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अल्लाह! कोई हज्ज का सबब अब तू बना दे जल्वा मुझे फिर गुम्बद-ए-ख़ज़रा का दिखा दे ग़म ऐसा मदीने का अता कर दे इलाही खुशियों के गुलिस्ताँ को जो मेरे जला दे या रब! मैं तेरे ख़ौफ़ से रोता रहूँ हर दम दीवाना शहंशाह-ए-मदीना का बना दे जब नात सुनूँ झूम उठूँ इश्क़-ए-नबी में ऐसा मुझे मस्ताना मुहम्मद का बना दे सदक़े में मेरे ग़ौस के तू ख़्वाब में या रब जल्वा मुझे सुल्तान-ए-मदीना का दिखा दे सक़रात में गर रूह-ए-मुहम्मद पे नज़र हो हर मौत का झटका भी मुझे फिर तू मज़ा दे जब हश्र में आक़ा नज़र आएं मुझे ऐ काश! बे-साख़्ता क़दमों में मेरा शौक़ गिरा दे उफ़ हश्र की गर्मी भी है और प्यास बला की ऐ साक़ी-ए-कौसर मुझे एक जाम पिला दे हर वक़्त जहाँ से कि उन्हें देख सकूँ मैं जन्नत में मुझे ऐसी जगह प्यारे ख़ुदा दे अल्लाह! मुझे सोज़-ओ-गुदाज़ ऐसा अता कर तड़पा दे बयां नात-ए-नबी मुझ को रुला दे तू पीछे न हटना कभी ऐ प्यारे मुबल्लिग़! शैतान के हर वार को नाकाम बना दे अत्तार हूँ मैं उन का गदा अब तू तवज्जो बस जानिब-ए-शाहान-ए-जहाँ मेरी बुला दे