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Aye Arab ke Tajdar! Ahlan wa sahlan marhaba

Written by Muhammad Ilyas Attar Qadri

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ऐ अरब के ताजदार, अहलन व सहलन मरहबा ऐ रसूले ज़ी वक़ार, अहलन व सहलन मरहबा आए शाहे नामदार, अहलन व सहलन मरहबा सब पुकारो बार बार, अहलन व सहलन मरहबा ऐ हबीबे करदगार, अहलन व सहलन मरहबा ऐ ख़ुदा के शाहकार, अहलन व सहलन मरहबा आमना के गुले इज़हार, अहलन व सहलन मरहबा ऐ हमारे शहरे यार, अहलन व सहलन मरहबा अंबिया के ताजदार, अहलन व सहलन मरहबा तैबा के नाका सवार, अहलन व सहलन मरहबा मरहमे कल्बे फ़िगार, अहलन व सहलन मरहबा मेरा बिगड़ा दिल संवार, अहलन व सहलन मरहबा इज़्ज़ते रुस्वाज़ार, अहलन व सहलन मरहबा क़ुव्वते ज़ारो नज़ार, अहलन व सहलन मरहबा नूर की बरसी फुहार, अहलन व सहलन मरहबा आया हर शय पर निखार, अहलन व सहलन मरहबा कर मुनव्वर कल्बे तार, अहलन व सहलन मरहबा दूर हो दिल का ग़ुबार, अहलन व सहलन मरहबा सब से बढ़ कर कामगार, अहलन व सहलन मरहबा बायसे बागो बहार, अहलन व सहलन मरहबा जल्वा कर दे आशकार, अहलन व सहलन मरहबा हो फ़िदा अत्तारज़ार, अहलन व सहलन मरहबा