ऐ अरब के ताजदार, अहलन व सहलन मरहबा
ऐ रसूले ज़ी वक़ार, अहलन व सहलन मरहबा
आए शाहे नामदार, अहलन व सहलन मरहबा
सब पुकारो बार बार, अहलन व सहलन मरहबा
ऐ हबीबे करदगार, अहलन व सहलन मरहबा
ऐ ख़ुदा के शाहकार, अहलन व सहलन मरहबा
आमना के गुले इज़हार, अहलन व सहलन मरहबा
ऐ हमारे शहरे यार, अहलन व सहलन मरहबा
अंबिया के ताजदार, अहलन व सहलन मरहबा
तैबा के नाका सवार, अहलन व सहलन मरहबा
मरहमे कल्बे फ़िगार, अहलन व सहलन मरहबा
मेरा बिगड़ा दिल संवार, अहलन व सहलन मरहबा
इज़्ज़ते रुस्वाज़ार, अहलन व सहलन मरहबा
क़ुव्वते ज़ारो नज़ार, अहलन व सहलन मरहबा
नूर की बरसी फुहार, अहलन व सहलन मरहबा
आया हर शय पर निखार, अहलन व सहलन मरहबा
कर मुनव्वर कल्बे तार, अहलन व सहलन मरहबा
दूर हो दिल का ग़ुबार, अहलन व सहलन मरहबा
सब से बढ़ कर कामगार, अहलन व सहलन मरहबा
बायसे बागो बहार, अहलन व सहलन मरहबा
जल्वा कर दे आशकार, अहलन व सहलन मरहबा
हो फ़िदा अत्तारज़ार, अहलन व सहलन मरहबा