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Aye Shaafi-e-Umam Shah-e-Zee Jah Le Khabar

Written by Imam Ahmad Raza Khan Qadri

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ए शाफे-ए-उमम शह-ए-ज़ी जाह ले ख़बर लिल्लाह ले ख़बर मेरी लिल्लाह ले ख़बर दरिया का जोश, नाव न बेड़ा न नाख़ुदा मैं डूबा, तू कहाँ है मेरे शाह ले ख़बर मंज़िल कड़ी है रात अंधेरी में ना-बलद ए ख़िज़्र ले ख़बर मेरी ए माह ले ख़बर पहुंचे पहुंचने वाले तो मंज़िल मगर शहा उन की जो थक के बैठे सर-ए-राह ले ख़बर जंगल दरिंदों का है मैं बे-यार-ए-शब क़रीब घेरे हैं चार-सम्त से बद-ख़्वाह ले ख़बर मंज़िल नई अज़ीज़ जुदा लोग ना-शनास टूटा है कोह-ए-ग़म में पुर-काह ले ख़बर वह सख्तियां सवाल वह सूरतें मुहीब ए ग़मज़दों के हाल से आगाह ले ख़बर मुज़रिम को बारगाह-ए-अदालत में लाए हैं तकता है बे-कसी में तेरी राह ले ख़बर अहल-ए-अमल को उन के अमल काम आएंगे मेरा है कौन तेरे सिवा आह ले ख़बर पुर-ख़ार राह, बरहना-पा, तिश्ना-ए-आब दूर मौला पड़ी है आफ़त-ए-जान-गाह ले ख़बर बाहर ज़ुबानें प्यास से हैं, आफ़ताब गर्म कौसर के शाह कसरल्लाहु ले ख़बर माना कि सख्त मुज़रिम व नाकारा है रज़ा तेरा ही तो है बंदा-ए-दरगाह ले ख़बर