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पीरो मुर्शिद मेरे जनाबे रज़ा हाफ़िज़ो हाज आलिमो फ़ाज़िल मुफ़्तिए दीन मुजद्दिदे मिल्लत उलमा जिन के फ़ैज़ के साएल अहले ईमान बल्कि आदा भी जिन के फ़ज़्लो उलूम के क़ाएल जुम्मा के दिन सफ़र की थी पचीस अपने रब से वह हो गए वासिल