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दिल की कलियां खिलें क़ाफ़िले में चलो

Written by Muhammad Ilyas Attar Qadri

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दिल की कलियां खिलें क़ाफ़िले में चलो, रंजो-ग़म भी मिटें क़ाफ़िले में चलो फ़ज़्ल की बारिशें, रहमतें नेअमतें, गर तुम्हें चाहिएं क़ाफ़िले में चलो काफ़िरों को चलें, मुशरिकों को चलें, दवते-दीन दें, क़ाफ़िले में चलो आइए आल्मो! दीन की तब्लीग़ को, मिल के सारे चलें, क़ाफ़िले में चलो आओ ऐ आशिक़ीं, मिल के तब्लीग़ दें, काफ़िरों को करें, क़ाफ़िले में चलो काफ़िर आ जाएंगे, राहे-हक़ पाएंगे, इंशाअल्लाह चलें, क़ाफ़िले में चलो कुफ़्र का सर झुके, दीन का डंका बजे, इंशाअल्लाह चलें, क़ाफ़िले में चलो चश्मे-बीना मिले सुख से जीना मिले, आओ सारे चलें, क़ाफ़िले में चलो दिल की कालक धुले, दर्दे-इसयां टले, आओ सब चल पड़ें, क़ाफ़िले में चलो ख़ूब ख़ुद दारियां, और ख़ुश अख़लाकियां, आइए सीख लें, क़ाफ़िले में चलो आशिक़ाने-रसूल इन से ले लो जो फूल, तुम को सुन्नत के दें क़ाफ़िले में चलो