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Dil ko un se Khuda juda na kare

Written by Imam Ahmad Raza Khan Qadri

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दिल को उन से खुदा जुदा न करे बे-कसी लूट ले खुदा न करे उस में रोज़ा का सजदा हो के तवाफ़ होश में जो न हो वह क्या न करे ये वही हैं कि बख़्श देते हैं कौन उन जुर्मों पर सज़ा न करे सब तबीबों ने दे दिया है जवाब आह ईसा अगर दवा न करे दिल कहां ले चला हरम से मुझे अरे तेरा बुरा खुदा न करे उज़्रे उम्मीदे अफ़्व गर न सुनें रू-सयाह और क्या बहाना करे दिल में रौशन है शम्अ-ए-इश्क़-ए-हुज़ूर काश जोश-ए-हवस हवा न करे हश्र में हम भी सैर देखेंगे मुन्किर आज उन से इल्तिजा न करे ज़ुअफ़ माना मगर ये ज़ालिम-ए-दिल उन के रस्ते में तो थका न करे जब तेरी ख़ू है सब का जी रखना वुही अच्छा जो दिल बुरा न करे दिल से इक ज़ौक़-ए-मय का तालिब हूँ कौन कहता है इत्तक़ा न करे ले रज़ा सब चले मदीने को मैं न जाऊँ अरे ख़ुदा न करे