Home/Imam Ahmad Raza Khan Qadri/Dushman-e-Ahmad Pe Shiddat Kijiye

Dushman-e-Ahmad Pe Shiddat Kijiye

Written by Imam Ahmad Raza Khan Qadri

100%
दुश्मन-ए-अहमद पे शिद्दत कीजिए मुलहिदों की क्या मुरव्वत कीजिए ज़िक्र उन का छेड़िए हर बात में छेड़ना शैतान का आदत कीजिए मिस्ल-ए-फ़ारस ज़लज़ले हों नज्द में ज़िक्र-ए-आयात-ए-विलादत कीजिए गैज़ में जल जाएँ बे-दीनों के दिल "या रसूल अल्लाह" की कसरत कीजिए कीजिए चर्चा उन्हीं का सुब्ह-ओ-शाम जान-ए-काफ़िर पर क़यामत कीजिए आप दरगाह-ए-ख़ुदा में हैं वजीह हाँ शफ़ाअत बिल-वजाहत कीजिए हक़ तुम्हें फ़रमा चुका अपना हबीब अब शफ़ाअत बिल-मोहब्बत कीजिए इज़्न कब मिल चुका अब तो हुज़ूर हम ग़रीबों की शफ़ाअत कीजिए मुलहिदों का शक निकल जाए हुज़ूर जानिब-ए-मह फिर इशारा कीजिए शिरक ठहरे जिस में तअज़ीम-ए-हबीब उस बुरे मज़हब पे लानत कीजिए ज़ालिमों! महबूब का हक़ था यही इश्क़ के बदले अदावत कीजिए वद-दुहा, हुजरात, अलम नशरह से फिर मोमिनो! इत्माम-ए-हुज्जत कीजिए बैठते उठते हुज़ूर-ए-पाक से इल्तिजा व इस्तिआअत कीजिए या रसूल अल्लाह दुहाई आप की गोशमाल-ए-अहल-ए-बिदअत कीजिए गौस-ए-आज़म आप से फ़र्याद है ज़िंदा फिर ये पाक मिल्लत कीजिए या ख़ुदा तुझ तक है सब का मुंतही औलिया को हुक्म-ए-नुसरत कीजिए मेरे आक़ा हज़रत-ए-अच्छे मियां हो रज़ा वो सूरत कीजिए