ग़ैर मुमकिन है सना-ए-मुस्तफ़ा
खुद ही वासिफ़ है ख़ुदा-ए-मुस्तफ़ा
दिल में दे या रब विला-ए-मुस्तफ़ा
और हो सीना में जा-ए-मुस्तफ़ा
तेरे प्यारे का मैं दीवाना बनूं
ये दुआ है ख़ुदा-ए-मुस्तफ़ा
मुस्तफ़ा हैं सारी ख़िलक़त के लिए
सारी ख़िलक़त है बरा-ए-मुस्तफ़ा
ढूंढते हैं सब रज़ा अल्लाह की
चाहता है हक़ रज़ा-ए-मुस्तफ़ा
क्या नसीम-ए-खुल्द खुश आए उसे
जिस के सर में है हवा-ए-मुस्तफ़ा