Home/Maulana Muhammad Jamil-ur-Rehman Razvi/Ghair Mumkin Hai Sana-e-Mustafa

ग़ैर मुमकिन है सना-ए-मुस्तफ़ा

Written by Maulana Muhammad Jamil-ur-Rehman Razvi

100%
ग़ैर मुमकिन है सना-ए-मुस्तफ़ा खुद ही वासिफ़ है ख़ुदा-ए-मुस्तफ़ा दिल में दे या रब विला-ए-मुस्तफ़ा और हो सीना में जा-ए-मुस्तफ़ा तेरे प्यारे का मैं दीवाना बनूं ये दुआ है ख़ुदा-ए-मुस्तफ़ा मुस्तफ़ा हैं सारी ख़िलक़त के लिए सारी ख़िलक़त है बरा-ए-मुस्तफ़ा ढूंढते हैं सब रज़ा अल्लाह की चाहता है हक़ रज़ा-ए-मुस्तफ़ा क्या नसीम-ए-खुल्द खुश आए उसे जिस के सर में है हवा-ए-मुस्तफ़ा