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ग़म-ए-फ़ुरक़त लाए काश हर दम या रसूलल्लाह

Written by Muhammad Ilyas Attar Qadri

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ग़म-ए-फ़ुरक़त लाए काश हर दम या रसूलल्लाह रहूँ हर वक़्त में बादिया-ए-ग़म या रसूलल्लाह जिगर भी सोख्ता जाँ सोख्ता, दिल चाक सीना चाक मिले ग़म और ग़म बस आप का ग़म या रसूलल्लाह नहीं ताज-ए-शाही की आरज़ू बस एक अरमाँ है निकल जाए तुम्हारे रूबरू दम या रसूलल्लाह मेरे आक़ा बहाए अश्क जो बहर-ए-मदीना में अता कर दो मुझे वो चश्म-ए-पुर-नम या रसूलल्लाह हमारे दिल की हर धड़कन से तैबा की सदा निकले रहे ज़िक्र-ए-मदीना लब पे हर दम या रसूलल्लाह शाह! चश्म-ए-करम हो तशनगान-ए-दीद पर अब तो तुम्हारी दीद का शरबत पिएं हम या रसूलल्लाह मदीना... ऐ: दीदार के प्यासे