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Hajjan ke liye duaon aur nasihaton ka guldasta

Written by Muhammad Ilyas Attar Qadri

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आमना अत्तारिया हज्ज को चले उम्मीद है गुंबद-ए-ख़ज़रा की दीद उसकी बिला शक ईद है मरहबा तुम को मुबारक हो मदीने का सफ़र फ़ज़्ल-ए-रब से तुम पे नाज़िल रहमतें हों हर डगर या ख़ुदा! आसान हो इस के लिए हज्ज का सफ़र ज़ौक़ बढ़ता ही रहे इस का ख़ुदा-ए-बहर ओ बर रोने वाली आंख दे और चाक सीना कर अता यारब! इस को उल्फ़त-ए-शाह-ए-मदीना कर अता ज़र्रे ज़र्रे का अदब अल्लाह इस को हो नसीब अज़ तुफ़ैल-ए-सय्यिदी अहमद रज़ा रब्ब-ए-मुजीब! इम्तिहान दरपेश हो राह-ए-मदीना में अगर सब्र कर तू सब्र कर हां सब्र कर बस सब्र कर (वाज़ेह रहे के साबिक़ा सफ़हात में ये कलाम कुछ तग़य्युर के साथ मज़कूर के लिए कहा गया है उम्मीद है के ज़रूरी तफ़रीक़ के साथ दोनों कलाम अलग अलग होने में क़ारीईन को सहूलत रहेगी) कोई धुटकारे या झाड़े बल्कि मारे सब्र कर मत झगड़, मत बुड़बुड़ा, पा अज्र-ए-रब से सब्र कर राह-ए-जानां का हर एक कांटा भी गोया फूल है जो कोई शिकवा करे उसकी यक़ीनन भूल है तुम ज़बां का आंख का दु-कुफ़्ल-ए-मदीना लो लगा वरना बढ़ सकता है इसयां का वहां भी सिलसिला गुफ़्तगू सादिर ना कुछ बेकार हो एहराम में लब पे बस लब्बैक की तकरार हो एहराम में जब करे तू खाना-ए-काबा का रो रो कर तवाफ़ ये दुआ करना ख़ुदा मेरे गुनाह कर दे मुआफ़ तेरा हज्जन! जिस घड़ी हो दाख़िला अरफ़ात में करना नादिम हो के तू आह ओ बुका अरफ़ात में हालत-ए-एहराम में याद-ए-कफ़न हो क़ब्र हो याद कर अरफ़ात में तू हश्र के मैदान को नू को जब अरफ़ात में हाजी इकट्ठे हों सभी भूल मत जाना दुआओं में मुझे तू उस घड़ी जिस घड़ी करने लगे कुर्बान मिना में जानवर तू तसव्वुर ही में अपने नफ़्स को भी ज़ब्ह कर हाज़िरी हो जब मदीने में तुम्हारी हज्जिनो! इश्क़-ए-शाह में ख़ूब करना आह-ओ-ज़ारी हज्जिनो! ले के जजना! बारगाह-ए-मुस्तफ़ा में मेरा नाम वुश्त बस्ता अर्ज़ करना उन से रो रो कर सलाम रो के करना मेरे ईमान की हिफ़ाज़त की दुआ दे शहादत का शरफ़ मुझ को मदीने में ख़ुदा इस का हज्ज या रब! नबी का वास्ता कर ले क़बूल दोजहां में इस पे बरसाया ख़ुदा रहमत के फूल अपने मुँह से ख़ुद को जजना तू कभी कहना नहीं बे-ज़रूरत अपनी नेकी का बयां अच्छा नहीं हर बरस हज्ज का शरफ़ पाओ मदीने जाओ तुम और बक़ी-ए-पाक में आख़िर में मदफ़न पाओ तुम करना तुम अत्तार के हक़ में दुआ-ए-मग़फ़िरत इस जहां में आफ़ियत हो उस जहां में आफ़ियत