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Hamare Dil Se Zamane Ke Gham Mita Ya Rab

Written by Muhammad Ilyas Attar Qadri

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हमारे दिल से ज़माने के ग़म मिटा या रब हो मीठे मीठे मदीने का ग़म अता या रब ग़म-ए-हयात अभी राहतों में ढल जाएँ तेरे अता का इशारा जो हो गया या रब पए हुसैन-ओ-हसन फ़ातिमा अली हैदर हमारे बिगड़े हुए काम दे बना या रब हमारी बिगड़ी हुई आदतें निकल जाएँ मिले गुनाहों के अमराज़ से शिफ़ा या रब मुझे दे खुद को भी और सारी दुनिया वालों को सुधारने की तड़प और हौसला या रब हमेशा हाथ भलाई के वास्ते उठें बचाना ज़ुल्म-ओ-सितम से मुझे सदा या रब रहें भलाई की राहों में गामज़न हर दम करें न रुख़ मेरे पाँव गुनाह का या रब गुनाहगार तलबगार-ए-अफ़ू-ओ-रहमत है अज़ाब सहने का किस में है हौसला या रब करम से "नेकी की दावत" का खूब जज़्बा दे दूँ धूम सुन्नत-ए-महबूब की मचा या रब अता हो दावत-ए-इस्लामी को क़बूल-ए-आम इसे शुरूर-ओ-फ़ितन से सदा बचा या रब मैं पुल-ए-सिरात बिला ख़ौफ़ पार कर लूँगा तेरे करम का सहारा जो मिल गया या रब कहीं का आह! गुनाहों ने अब नहीं छोड़ा अज़ाब-ए-नार से अत्तार को बचा या रब