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Hasrat-o-Ahasrata Shah-e-Madina Alwida

Written by Muhammad Ilyas Attar Qadri

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हसरत-ओ-अहसरता शाह-ए-मदीना अलविदा फट रहा है आप के ग़म में ये सीना अलविदा ख़ूब आता था सुरूर आक़ा मदीने में मुझे छूटा है हाये अब मीठा मदीना अलविदा तेरी गलियों से बिछड़ कर भी है कोई ज़िंदगी दूर रह कर हाये मरना हाये जीना अलविदा आंख रोती है तड़पता है दिल-ए-ग़मगीं अब लुट रहा है हाये क़ुर्बत का ख़ज़ीनह अलविदा दिल मेरा ग़म-नाक-ए-फ़ुरक़त से कलीजा चाक चाक फट रहा है तेरे ग़म में हाये! सीना अलविदा मैं शिकस्ता दिल लिये बोझल क़दम रखता हुआ चल पड़ा हूँ या शहंशाह मदीना अलविदा खून रोता है दिल-ए-मग्मूम रंजर शाह में चाक है मेरा कलेजा चाक सीना अलविदा काफ़िला चलने को है सब रो रहे हैं ज़ार ज़ार टूटा है हाय! दिल का आबगीना अलविदा जाने कब फिर आएगा बैठा मदीना देखने कब सफ़र पाएगा बदकार ओ कमीना अलविदा नाम सुनते ही मदीने का मैं आका रो पडूँ काश! आ जाए मुझे ऐसा क़रीना अलविदा आप की यादों के सदके वो मिले संजीदगी मैं न फिर बेजा हँसूँ शाह-ए-मदीना अलविदा माल का तालिब नहीं दे दो फ़क़त सोज़-ए-बिलाल हो अता अपने गदा को ये ख़ज़ीना अलविदा अपनी उल्फ़त की शराब ऐसी पिला आए न होश मुझ को हरगिज़ ऐ शहंशाह-ए-मदीना अलविदा काश! मैं जाऊँ जिधर देखूँ मदीने की बहार हो अता आका मुझे वो चश्म-ए-बीना अलविदा गो बुरा हूँ, बे-अमल हूँ पर नहीं बे-अदब आप का हूँ, आप का, गो हूँ कमीना, अलविदा अल-फ़िराक़ आह अल-फ़िराक़ ऐ प्यारे आका अल-फ़िराक़ फिर बुला लो जल्द आका-ए-मदीना अलविदा या रसूल अल्लाह! अब ले लो सलाम-ए-आखिरी चलने वाला है कराची को सफीना अलविदा आह! अब अत्तार जाता है मदीने से वतन हाए मजबूरी! सुकून-ए-क़ल्ब छीना अलविदा