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Ho Ata Apna Gham, Tajdar-e-Haram

Written by Muhammad Ilyas Attar Qadri

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हो अता अपना ग़म, ताजदार-ए-हरम, दीजिये आँख नम, ताजदार-ए-हरम कीजिये शाद-काम, अपना कह के ग़ुलाम, झूम जाएंगे हम, ताजदार-ए-हरम माल भी आल भी, बाल भी खाल भी, सदक़े जान-ओ-दिलम, ताजदार-ए-हरम तेरा खाते हैं हम, तेरा पीते हैं हम, तेरे रब की क़सम, ताजदार-ए-हरम ऐसा कर दो सबब, बस उतर जाए अब, दिल में ख़ार-ए-हरम, ताजदार-ए-हरम ये चमक ये दमक, ये महक ये लहक, है बहार-ए-क़दम, ताजदार-ए-हरम जो भी माँगा मिला, मरहबा मरहबा, शान-ए-जود-ओ-करम, ताजदार-ए-हरम घर सजाते रहें और मनाते रहें, ईद-ए-मीलाद-ए-हम, ताजदार-ए-हरम ईद-ए-मीलाद में, गाएंगे याद में, सब्ज़ प्यारा ʿअलम, ताजदार-ए-हरम गुनगुनाते रहें गीत गाते रहें, उम्र भर तेरे हम, ताजदार-ए-हरम तेरे दीवाने सब, आएं सू-ए-अरब, देखें सारे हरम, ताजदार-ए-हरम सीना जलता रहे, दिल मचलता रहे, हो निगाह-ए-करम, ताजदार-ए-हरम या रसूल-ए-ख़ुदा, सरवर-ए-अंबिया, हो निगाह-ए-करम, ताजदार-ए-हरम ग़म की काली घटा, को शहा दो हटा, हो निगाह-ए-करम, ताजदार-ए-हरम मेहर-ओ-माह-ए-मीं, है ये अर्ज़-ए-ख़ज़ें, हो निगाह-ए-करम, ताजदार-ए-हरम या नबी अल-मदद, ऐ रसूल अल-मदद, हो करम हो करम, ताजदार-ए-हरम जल्वः-ए-यार हो, क़ब्र-ए-अत्तार हो, काश हो ये करम, ताजदार-ए-हरम