Ho Naib-e-Sarwar-e-Do Aalam, Imam-e-Aazam Abu Hanifa
Written by Muhammad Ilyas Attar Qadri
हो नाईब-ए-सरवर-ए-दो आलम, इमाम-ए-आज़म अबू हनीफा
सिराज-ए-उम्मत फकीह-ए-अफखम, इमाम-ए-आज़म अबू हनीफा
है नाम नोमान इब्न-ए-साबित, अबू हनीफा है उन की कुनियत
पुकारता है यह कह के आलम, इमाम-ए-आज़म अबू हनीफा
जो बे-मिसाल आप का है तक़वा, तो बे-मिसाल आप का है फतवा
हैं इल्म-ओ-तक़वा के आप संगम, इमाम-ए-आज़म अबू हनीफा
गुनह के दल्दल में फँस गया हूँ, गले गले तक मैं धँस गया हूँ
निकालो मुझ को बराए आदम, इमाम-ए-आज़म अबू हनीफा
हसद की बीमारी बढ़ चली है, लड़ाई आपस में ठन गई है
शह-ए-मुसलमाँ हूँ मुनज़्ज़म, इमाम-ए-आज़म अबू हनीफा
दियार-ए-बगदाद में बुला कर, मज़ार अपना दिखा जहाँ पर
हैं नूर की बारिशें छम छम, इमाम-ए-आज़म अबू हनीफा
अता हो खौफ-ए-खुदा खुदाया, दो उल्फत-ए-मुस्तफ़ा खुदाया
करूँ अमल सुन्नतों पे हर दम, इमाम-ए-आज़म अबू हनीफा
है धूम चारों तरफ सखी की, भरी है झोली हर एक गदा की
अता हो मुझ को भी तैबा का ग़म, इमाम-ए-आज़म अबू हनीफा
तुम्हारे दरबार का गदा हूँ, मैं साइल-ए-इश्क-ए-मुस्तफ़ा हूँ
करम पये शाह-ए-गौस-ए-आज़म, इमाम-ए-आज़म अबू हनीफा
फुजूल गोई की निकले आदत, हो दूर बे-जा हँसी की ख़सलत
दुरूद पढ़ता रहूँ मैं हर दम, इमाम-ए-आज़म अबू हनीफा
बला का पहरा लगा हुआ है, मुसीबतों में घिरा हुआ है
तरा मुक़ल्लिद इमाम-ए-आज़म, इमाम-ए-आज़म अबू हनीफा
शहाँ अदू का सितम है पैहम, मदद को आओ इमाम-ए-आज़म
सिवा तुम्हारे है कौन हमदम, इमाम-ए-आज़म अबू हनीफा
ना जीते जी मुझ पे आये आफत मैं क़ब्र में भी रहूँ सलामत
बरोज़-ए-महशर भी रखना बे-ग़म, इमाम-ए-आज़म अबू हनीफा
मरूँ शहा ज़ेर-ए-सब्ज़ गुम्बद, हो मदफ़न आका बक़ी-ए-ग़रक़द
करम बराए रसूल-ए-अकरम, इमाम-ए-आज़म अबू हनीफा
हुई शहा फ़र्द-ए-जुर्म आइद, बचा फँसा है तरा मुक़ल्लिद
फ़रिश्ते ले चले जहन्नम, इमाम-ए-आज़म अबू हनीफा
जिगर भी ज़ख्मी है दिल भी घायल, हज़ार फिक्रें हैं सौ मसाइल
दुखों का अत्तार को दो मरहम, इमाम-ए-आज़म अबू हनीफा