इमाम-ए-अकबर

Written by Mufti Ahmad Yar Khan Naeemi

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इल्म में ज़ुहद में बे-शुब्हा तो सब से बढ़ कर कि इमामत से तेरी खुल गए जौहर सिद्दीक़ इस इमामत से खुला तुम हो इमाम-ए-अकबर थी ये ही रम्ज़-ए-नबी कहते हैं हैदर सिद्दीक़ तू है आज़ाद सफ़र से तेरे बंदे आज़ाद है ये सालिक भी तेरा बंदा-ए-बे-ज़र सिद्दीक़