जान ओ दिल या रब हो क़ुर्बान हबीब-ए-किब्रिया
और हाथों में हो दामान-ए-हबीब-ए-किब्रिया
आंख में हो नूर ओ निदां-ए-हबीब-ए-किब्रिया
सर में हो सौदा ओ अरमान-ए-हबीब-ए-किब्रिया
उन के फ़ैज़-ए-नूर ने कौनैन को रौशन किया
दोनों आलम पर है एहसान-ए-हबीब-ए-किब्रिया
ज़िंदगी हो या मुझे मौत आए दोनों हाल में
मैं हूं या रब और बयाबान-ए-हबीब-ए-किब्रिया
कैसा फ़ख़्र ओ नाज़ हो अपने मुक़द्दर पर अगर
सग बनाएं मुझ को दरबान-ए-हबीब-ए-किब्रिया
एक नज़र देखो जमाल-ए-आफ़ताब-ए-हाशमी
मेरी आंखों पर हो एहसान-ए-हबीब-ए-किब्रिया
बन के मंगता उन के दर के शाह-ए-आलम हो गए
ऐ ज़हे क़िस्मत गदायान-ए-हबीब-ए-किब्रिया