जाह-ओ-जलाल दो न ही माल-ओ-मनाल दो
सोज़-ए-बिलाल बस मेरी झोली में डाल दो
दुनिया के सारे ग़म मेरे दिल से निकाल दो
ग़म अपना या हबीब! बराये बिलाल दो
हज्र-ओ-फ़िराक़ तो मिला दो इज़्तिराब भी
बे-ताब क़ल्ब-ए-अज़पये सोज़-ए-बिलाल दो
बहती रहे जो हर घड़ी बस याद में शहा!
वो चश्म-ए-अश्कबार पये ज़ुलजलाल दो
सीना मदीना हो मेरा दिल भी मदीना हो
फ़िक्र-ए-मदीना दो मुझे मदनी ख़याल दो
हर आन बस तसव्वुर-ए-तैयबा में गुम रहूँ
ऐसा बुलंद शाह-ए-मदीना! ख़याल दो
दो दर्द-ए-सुन्नतों का पये शाह-ए-करबला
उम्मत के दिल से लज़्ज़त-ए-इसयाँ निकाल दो
ख़ुल्क़-ए-अज़ीम से मुझे हिस्सा अता करो!
बे-जा हँसी की ख़सलत-ए-बद को निकाल दो
ज़िक्र-ओ-दुरूद हर घड़ी विर्द-ए-ज़बाँ रहे
मेरी फ़ज़ूल गोई की आदत निकाल दो
दोनों जहाँ की आफ़तें मौला मुसीबतें
सदक़े में मेरे ग़ौस के सरकार! टाल दो
अत्तार को बुला के मदीने में दो बक़ीअ
दो फूलों के तुफ़ैल हों पूरे सवाल दो