Home/Muhammad Ilyas Attar Qadri/Jo Nabi ki yaad mein kho gaya, woh Khuda-e-Pak ka hogaya

जो नबी की याद में खो गया, वो ख़ुदा-ए-पाक का होगया

Written by Muhammad Ilyas Attar Qadri

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जो नबी की याद में खो गया, वो ख़ुदा-ए-पाक का होगया दोजहां उसके संवर गए, उसे आख़िरत में ख़ुशी रही मुझे या नबी! तेरी दीद हो, तेरी दीद हो मेरी ईद हो तुझे जिसने देखा हज़ार बार! उसे फिर भी तश्न-लबी रही न पसंद आएं उसे चमन, न ही खेत भाएं हरे भरे जो निगाह में है बसी रही, तो मदीने ही की गली रही मुझे अब मदीने में लो बुला, इसी साल हज्ज भी करूं शहा हो करम पये शह-ए-कर्बला, यही इल्तिजा मदनी रही मरी जां हो जिस्म से जब जुदा, हो नज़र में जलवा-ए-मुस्तफ़ा हो मदीने में मेरा ख़ातिमा, यह दुआ ख़ुदा-ए-ग़नी रही मदनी! गुनाह की आदतें, नहीं जातें, आप ही कुछ करें मैं ने कोशिशें कीं बहुत मगर, मरी हालत-ए-आह! बुरी रही मुझे शौक़ दीन शब-ओ-रोज़ दे, यही वलवला यही सोज़ दे तेरी सुन्नतें करूं आम में, कि इसी में तेरी ख़ुशी रही तू सग-ए-मदीना को या ख़ुदा, ग़म-ए-रोज़गार से ले बचा दे ग़म-ए-मदीना पये रज़ा, यही दुआ-ए-दिली रही