Home/Muhammad Ilyas Attar Qadri/Karoon Dam-ba-dam Main Sana-e-Madina

करूँ दम-ब-दम मैं सना-ए-मदीना

Written by Muhammad Ilyas Attar Qadri

100%
करूँ दम-ब-दम मैं सना-ए-मदीना, लगाता रहे दिल सदा-ए-मदीना खुदा की कसम! प्यारी प्यारी है जन्नत, मगर आशिकों को रुलाये मदीना जहाँ के नज़ारे हों आँखों से ओझल, नज़र में मेरी बस समाये मदीना खिला दे कली मेरे मुरझाये दिल की, खुदारा तू आ कर हवा-ए-मदीना जिसे चाहिये दोनों आलम की दौलत, वो कशकोल ले कर के आये मदीना इनायत से अल्लाह की रहमतों का, शब-ओ-रोज़ दरिया बहाये मदीना पये पीर-ओ-मुर्शद तू फरमा दे रोशन, मेरा कल्ब-ए-तीरा ज़िया-ए-मदीना शफअत की खैरात का जो है तालिब, बराये ज़ियारत वो आये मदीना ना दे या इलाही! मुझे तख्त-ए-शाही, बना दे मुझे बस गदा-ए-मदीना शब-ओ-रोज़ जलवे हैं माह-ए-अरब के, ना क्यों रात दिन जगमगाये मदीना तुझे वास्ता गौस-ओ-अहमद रज़ा का, अता कर इलाही फ़ज़ा-ए-मदीना बक़ी मुबारक में मदफ़न अता हो, करम कर खुदाया बराये मदीना मेरी खाक जिस दम उड़े या इलाही, उसे काश उडाये हवा-ए-मदीना पड़ोसी बना मुझ को जन्नत में उनका, खुदा-ए-मुहम्मद बराये मदीना लगा फ़ज्र में भाई घर घर पे जा कर, ज़रा दिल लगा कर 'सदा-ए-मदीना' जो दे रोज़ दो 'दर्स-ए-फैज़ान-ए-सुन्नत', मैं देता हूँ उसको दुआ-ए-मदीना सफ़र जो करे काफ़िलों में मुसलसल, मैं देता हूँ उसको दुआ-ए-मदीना जो पाबंद है इज्तिमाआत का भी, मैं देता हूँ उसको दुआ-ए-मदीना जो नेकी की दावत की धूमें मचाये, मैं देता हूँ उसको दुआ-ए-मदीना ज़बान पर जो 'कुफ़्ल-ए-मदीना' लगाये, मैं देता हूँ उसको दुआ-ए-मदीना जो आँखों पे कुफ़्ल-ए-मदीना लगाये, मैं देता हूँ उसको दुआ-ए-मदीना जो दीवाने फ़ुर्क़त में रोते हैं आक़ा, दिखा दो उन्हें अब फ़ज़ा-ए-मदीना दे सोज़-ए-जिगर चश्म-ए-तर कल्ब-ए-मुज़्तर, मुझे या इलाही बराये मदीना ये अत्तार मक्के से ज़िंदा सलामत, तड़पता हुआ काश आये मदीना