लाज रख मेरे दस्त-ए-दुआ की मेरे मौला तू खैरात देदे
अपनी रहमत की अपनी अता की मेरे मौला तू खैरात देदे
क़ल्ब में याद तेरी बसी हो ज़िक्र-ए-लब पर तेरा हर घड़ी हो
मस्ती ओ बे-ख़ुदी और फ़ना की मेरे मौला तू खैरात देदे
करना रहमत ख़ुदा मुझ पे अपनी रख इनायत सदा मुझ पे अपनी
दाईमी और हतमी रज़ा की मेरे मौला तू खैरात देदे
नफ़्स ने लज़्ज़तों में फँसाया मुझ पे लुत्फ़ ओ करम हो ख़ुदाया
दिल से चाहत मिटा मासिवा की मेरे मौला तू खैरात देदे
अज़ पए ग़ौस-ए-आज़म विलायत अपनी रहमत से फ़र्मा इनायत
अपनी, अपने नबी की वला की मेरे मौला तू खैरात देदे