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Lam Yati Naziruka Fi Nazar

Written by Imam Ahmad Raza Khan Qadri

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लम याति नज़ीरुका फ़ी नज़रे मिस्ले तू न शुद पैदा जाना जग राज को ताज तोरे सर सो है तुझ को शह दूसरा जाना अल्-बह्रू अला वल्-मौजू तग़ा मिन बे-कस ओ तूफ़ाँ होश-रुबा मँझधार में हूँ बिगड़ी है हवा मोरी नैया पार लगा जाना या शम्सु नज़र्तु इला लैला चू ब-तैबा रसी अर्ज़े बकनी तोरी ज्योत की झल झल जग में रची मेरी शब ने दिन होना जाना लक बदरुन फ़िल-वजहिल-अजमल खत्ती हाला मह ज़ुल्फ़ी अबरी अजल तोरे चंदन चंदर परोकंडल रहमत की भरन बरसा जाना अना फ़ी अतशिन व सखाका अतम ए गेसू-ए-पाक ए अब्रे करम बरसन हारे रिम झिम रिम झिम दो बूंद इधर भी गिरा जाना या क़ाफ़िलती ज़ीदी अजलिकि रहमे बर हसरते तिशना लबक मोरा जीरा करे डरक डरक तैबा से अभी न सुना जाना वाहाली सुवीअतिन ज़हबत आँ अहदे हुज़ूर बा रघत जब याद आवे मोहे परत प्रीत दरदा वह मदीना का जाना अल-क़ल्बु शजिन वल-हममु शुजूं दिले ज़ार चुना जाँ ज़ेरे जुनूं पत अपनी पत में का से कहूं मेरा कौन है तेरे सिवा जाना अर-रूह फ़िदाका फ़ज़िद हरक़न यक शोला दगर बरज़ने इश्क़ा मोरा तन मन धन सब फूँक दिया यह जान भी प्यारे जला जाना बस ख़ाम-ए-ख़ाम-ए-रज़ा न यह तर्ज़ मेरी न यह रंग मेरा इरशादे अहीब था नाचार था इस राह पड़ा जाना