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मची है धूम पैग़म्बर की आमद आमद है

Written by Maulana Muhammad Jamil-ur-Rehman Razvi

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मची है धूम पैग़म्बर की आमद आमद है हबीब-ए-खालिक़-ए-अकबर की आमद आमद है क्या है सब्ज़ अलम नसब बाम-ए-काबा पर के दो जहाँ के सरवर की आमद आमद है न क्यों हो नूर से तबदील कुफ़्र की ज़ुल्मत ख़ुदा के माह-ए-मुनव्वर की आमद आमद है है जिब्रील को हुक्म-ए-ख़ुदा ख़बर कर दो के आज हक़ के पैग़म्बर की आमद आमद है ख़ुशी के जोश में हैं बुलबुलें भी नग़्मा-गनाँ चमन में आज गुल-ए-तर की आमद आमद है दोज़ानू हो के अदब से पढ़ो सलवात-ओ-सलाम अज़ीज़-ओ-ख़ल्क़ के मसदर की आमद आमद है जमील-ए-क़ादरी कह दे खड़े हों अह्ल-ए-सुनन हमारे हामी-ओ-यावर की आमद आमद है