हवा हूँ दाद-ए-सितम को मैं हाज़िर-ए-दरबार
गवाह हैं दिल-ए-महज़ूँ ओ चश्म-ए-दरिया बार
तरह तरह से सताता है ज़ुमरा-ए-अशरार
बदीअ बहर-ए-ख़ुदा हुरमत-ए-शाह-ए-अबरार
मदार चश्म-ए-इनायत ज़मन दरीग़ मदार
निगाह-ए-लुत्फ़ ओ करम अज़ हसन दरीग़ मदार
इधर अक़ारिब-ए-अक़ारिब अदू ओ अजानिब-ए-ख़्वेश
इधर हूँ जोश-ए-मआसी के हाथ से दिल-ए-रेश
बयान किस से करूँ हैं जो आफ़तें दरपेश
फँसा है सख़्त बलाओं में यह अक़ीदत कीश
मदार चश्म-ए-इनायत ज़मन दरीग़ मदार
निगाह-ए-लुत्फ़ ओ करम अज़ हसन दरीग़ मदार
ना हूँ मैं तालिब-ए-अफ़सर ना साइल-ए-दीहिम
कि संग-ए-मंज़िल-ए-मक़सद है ख़्वाहिश-ए-ज़र ओ सीम
किया है तुम को ख़ुदा ने करीम इब्न-ए-करीम
फ़क़त यही है शहा आरज़ू-ए-अब्द-ए-अतीम
मदार चश्म-ए-इनायत ज़मन दरीग़ मदार
निगाह-ए-लुत्फ़ ओ करम अज़ हसन दरीग़ मदार
हवा है ख़ंजर-ए-अफ़कार से जिगर घायल
नफ़स नफ़स है अयाँ दम शुमारी-ए-बैल
मुझे हो रहमत-ए-आब-ए-दारू-ए-जराहते-दिल
ना ख़ाली हाथ फिरे आस्ताँ से यह साइल
मदार चश्म-ए-इनायत ज़मन दरीग़ मदार
निगाह-ए-लुत्फ़ ओ करम अज़ हसन दरीग़ मदार
नब्ज़ें साक़ित रूह-ए-मुज़्तर जी निढाल
दर्द-ए-इसयां से हुआ है ग़ैर-ए-हाल
बे-सहारों के सहारे हैं हुज़ूर
हामी-ओ-यावर हमारे हैं हुज़ूर
हम ग़रीबों पर करम फ़रमाइये
बद नसीबों पर करम फ़रमाइये
बे-क़रारों के सिरहाने आइये
दिलफ़गारों के सिरहाने आइये
जां-ब-लब की चारा फ़रमाई करो
जां-ए-ईसा हो मसीहाई करो
शाम है नज़दीक मंज़िल दूर है
पांव कैसे जां रंजूर है
मग्रिबी गोशों में फूटी है शफ़क़
ज़र्दी-ए-ख़ुर्शीद से है रंग-ए-फ़क़
राह ना मालूम सहरा पुर ख़तर
कोई साथी है ना कोई राहबर
ताइरों ने भी बसेरा ले लिया
ख़्वाहिश-ए-परवाज़ को रुख़्सत किया
हर तरफ़ करता हूं हैरत से निगाह
पर नहीं मिलती किसी सूरत से राह
सो बलाएं चश्म-ए-तर के सामने
यास की सूरत नज़र के सामने
दिल परेशान बात घबराई हुई
शक्ल पर अफ़्सुर्दगी छाई हुई
ज़ुल्मतें शब की ग़ज़ब ढाने लगीं
काली काली बदलियां छाने लगीं
इन बलाओं में फंसा है ख़ाना ज़ाद
आफ़तों में मुब्तला है ख़ाना ज़ाद