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मरहबा इज़्ज़त ओ कमाल-ए-हुज़ूर

Written by Allama Hasan Raza Khan

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मरहबा इज़्ज़त ओ कमाल-ए-हुज़ूर है जलाल-ए-ख़ुदा जलाल-ए-हुज़ूर उन की क़दमों की याद में मरिए कीजिए दिल को पामाल-ए-हुज़ूर दश्त-ए-ऐमन है सीना-ए-मोमिन दिल में है जलवा-ए-ख़याल-ए-हुज़ूर आफ़िरीनिश को नाज़ है जिस पर है वो अंदाज़-ए-बेमिसाल-ए-हुज़ूर माह की जान मेहर का ईमाँ जलवा-ए-हुस्न-ए-बेज़वाल-ए-हुज़ूर हुस्न-ए-यूसुफ़ करे ज़ुलैख़ाई ख़्वाब में देख कर जमाल-ए-हुज़ूर वक़्फ़-ए-इशजार-ए-मक़सद-ए-ख़ुद्दाम हर शब ओ रोज़ ओ माह ओ साल-ए-हुज़ूर