मरहबा इज़्ज़त ओ कमाल-ए-हुज़ूर
है जलाल-ए-ख़ुदा जलाल-ए-हुज़ूर
उन की क़दमों की याद में मरिए
कीजिए दिल को पामाल-ए-हुज़ूर
दश्त-ए-ऐमन है सीना-ए-मोमिन
दिल में है जलवा-ए-ख़याल-ए-हुज़ूर
आफ़िरीनिश को नाज़ है जिस पर
है वो अंदाज़-ए-बेमिसाल-ए-हुज़ूर
माह की जान मेहर का ईमाँ
जलवा-ए-हुस्न-ए-बेज़वाल-ए-हुज़ूर
हुस्न-ए-यूसुफ़ करे ज़ुलैख़ाई
ख़्वाब में देख कर जमाल-ए-हुज़ूर
वक़्फ़-ए-इशजार-ए-मक़सद-ए-ख़ुद्दाम
हर शब ओ रोज़ ओ माह ओ साल-ए-हुज़ूर