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Ma'rooza ba-bargah-e-Janaab-e-Amina Bibi Razi Allahu Anha

Written by Mufti Ahmad Yar Khan Naeemi

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सदक़ा तुम पर हूँ दिल-ओ-जां आमिना तुम ने बख़्शा हम को ईमां आमिना जो मिला जिस को मिला तुम से मिला दीन-ओ-ईमां, इल्म-ओ-इरफ़ान आमिना कुल जहां की माएं हों तुम पर फ़िदा तुम मुहम्मद की बनीं मां आमिना इब्न-ए-मरयम वाक़ई रब के रसूल पर मुहम्मद की बड़ी शान आमिना जिस शिकम में मुस्तफ़ा हों जा-गज़ीं अर्श-ए-आज़म से है ज़ीशान आमिना तुम से ईमां-ओ-अमानत और अमन तुम से फ़ैज़ान तुम से इरफ़ान आमिना आमिना के तीन मअने बिल-यक़ीन बा-अमानत अमन-ओ-ईमां आमिना तुम से अल्लाह-ओ-मुहम्मद हैं अयां नूर, हुदा है तुम में पिन्हां आमिना हम हैं मोमिन और तुम ईमान बख़्श चश्मा-ए-दीं तुम से रवां आमना तेरी तुर्बत का मुजावर मैं बनूं फिर निकालूं दिल के अरमां आमना महबत-ए-क़ुरआं नबी हैं और तुम हो नबी की मोहतरम मां आमना है ये सालिक आप के दर का फ़क़ीर मांगता है अम्न-ओ-ईमां आमना