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Ma'roozah Ba-Bargah-e-Sayyid-ush-Shuhada Imam-ul-Awliya Hazrat Hussain Radi Allahu Anhu

Written by Mufti Ahmad Yar Khan Naeemi

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सर्व है जो कटे इस्लाम की ख़िदमत के लिए आबरू वह जो गए दीन की अज़मत के लिए जो कह है दिल से जिगर पारह-ए-ज़हरा पे निसार ख़ुल्द है उसके लिए और वह जन्नत के लिए नाऊ हैं आल-ए-नबी नज़्म हैं असहाब-ए-रसूल लि लिल्लाहिल हम्द के है यह उम्मत के लिए हर अदना चीज़ हुआ करती है आला पे निसार जिस्म है जान के लिए जान है इत्रत के लिए क्यों झुके सामने अदना के वह ज़ात-ए-आली जिस का हर नक़्श-ए-क़दम क़िब्ला हो उम्मत के लिए नौनहाल-ए-चमन-ए-मुस्तफ़ा मुर्तज़वी जिसे क़ुदरत ने चुना ज़ीनत-ए-जन्नत के लिए जो के आगोश-ए-पैग़म्बर में पला फूला था कर्बला में वह कटा दीन की हिफ़ाज़त के लिए हाशमी बाग़ हुआ हाशमी ख़ून से सैराब बाग़-ए-ज़हरा कटा उस बाग़ की नज़हत के लिए इस्तक़ामत पे फ़िदा हैं तेरी ऐ दस्त-ए-हुसैन ना गया हाथ में बे-दीन के बैअत के लिए इस दोगाना पे फ़िदा सारी नमाज़ें जिस में धार हल्क़ूम पे सर-ख़म हो इबादत के लिए खुल गया इस से अगर हक़ पे ना होते असहाब दस्त-ए-हसनैन ना बढ़ता कभी बैअत के लिए सालिक असहाब तो नूरानी हैं और आल है नूर नूर को नूरी ही लाहिक था मईअत के लिए