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Meetha Madina hai jaana zaroor hai

Written by Muhammad Ilyas Attar Qadri

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मीठा मदीना है जाना ज़रूर है जाना हमें ज़रूर है जाना ज़रूर है राह-ए-मदीना के सभी कांटे हैं फूल से दीवाना बा-शऊर है जाना ज़रूर है होता है सख़्त इम्तिहां उल्फ़त की राह में आता मगर सुरूर है जाना ज़रूर है इश्क़-ए-रसूल देखिये हबशी बिलाल का ज़ख़्मों से चूर चूर है जाना ज़रूर है पुर-ख़ार राह पाओं में छाले भी पड़ गए इस में भी एक सुरूर है जाना ज़रूर है हिम्मत जवाब दे गई सरकार अल-मदद! ज़ाइर थकन से चूर है जाना ज़रूर है क्यों थक गए पलट गए भाई! बताइये? ये आप का क़ुसूर है जाना ज़रूर है जो राह-ए-तैयबा की हैं डराती सुऊबतें ये नफ़्स का फ़ुत्तूर है जाना ज़रूर है उश्शाक़ को तो मिलती है ग़म में भी राहत और आता बड़ा सुरूर है जाना ज़रूर है सरकार का मदीना यक़ीनन बिला-शुबह क़ल्ब-ओ-नज़र का नूर है जाना ज़रूर है मंज़र हसीन-ओ-दिलकुशा उन के दीयार का हां देखना ज़रूर है जाना ज़रूर है देखूं गा जा के गुंबद-ए-ख़ज़रा की मैं बहार रौज़ा वतन से दूर है जाना ज़रूर है मेहराब ओ मिंबर आप के डूबे हैं नूर में जाली भी नूर नूर है जाना ज़रूर है चादर तनी है गुंबदे खज़रा पे नूर की मीनार नूर नूर है जाना ज़रूर है पुर-नूर हर पहाड़ तो तैबा की ख़ाक का हर ज़र्रा रश्के तूर है जाना ज़रूर है शाह ओ गदा फ़क़ीर ओ ग़नी हर किसी का सर ख़म आप के हुज़ूर है जाना ज़रूर है बेहतर इसी बरस हो तो जल्दी बुलाइए ये इल्तिजा हुज़ूर है जाना ज़रूर है मर्ज़ी तुम्हारी तुम सुनो या मत सुनो मगर अपनी तो रट हुज़ूर है जाना ज़रूर है अत्तार क़ाफ़िला तो गया तुम भी उठ चलो मंज़िल अगरचे दूर है जाना ज़रूर है