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Mera Dil Pak Ho Sarkar Ki Mohabbat Se

Written by Muhammad Ilyas Attar Qadri

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मेरा दिल पाक हो सरकार की मोहब्बत से मुझे हो जाए नफ़रत काश! आक़ा माल-ओ-दौलत से मदीने से अगरचे दूर हूँ तेरी मशिय्यत से तड़पने की सआदत दे इलाही हिज्र-ओ-फ़ुरक़त से न लन्दन की न अमेरिका न पेरिस की सयाहत से सुकून-ए-क़ल्ब मिलता है मदीने की ज़ियारत से ख़ुदा हाफ़िज़ मदीने के मुसाफ़िर जा ख़ुदा हाफ़िज़ चलेंगे शू-ए-तैयबा हम भी एक दिन उन की रहमत से ख़ुदा की तुझ पे लाखों रहमतें हों ज़ाइर-ए-तैयबा! सलाम-ए-शौक़ कह देना मेरा माह-ए-रिसालत से मुहम्मद मुस्तफ़ा इस को भी सीने से लगाते हैं जिसे सब लोग ठुकराते हैं नफ़रत से हक़ारत से तुम्हारा नअल-ए-अक़दस ही हमारा ताज-ए-इज़्ज़त है हमारा वास्ता क्या ताज-ए-शाही से हुकूमत से जिगर प्यासा ज़बां सूखी ख़ज़ां छाई बहार आए दिल-ए-पुर-मुर्दा खुल उठे तेरे जलवों की नज़हत से गुनाहों की मैं चादर तान कर दिन रात सोता हूँ जगा दो या रसूल अल्लाह! मुझे अब ख़्वाब-ए-ग़फ़लत से गुनाहों से मेरा सारा वजूद अफ़सोस है लथड़ा मुझे अब पाक कर दीजे गुनाहों की नहूसत से नदामत से गुनाहों का इज़ाला कुछ तो हो जाता मुझे रोना भी आता नहीं हाय नदामत से करम ऐ शाफ़े-ए-महशर! खुले आमाल के दफ़्तर गो बदकार-ओ-कमीना हूँ मगर हूँ तेरी उम्मत से न नामे में इबादत है न पल्ले कुछ रियाज़त है इलाही! मग्फिरत फरमा हमारी अपनी रहमत से इलाही! वास्ता देता हूँ मैं मीठे मदीने का बचा दुनिया की आफत से बचा उक़्बा की आफत से मुसलमां ईद-ए-मीलादुन्नबी पर शाद होता है फ़क़त इब्लीस का चेला चढ़े जश्न-ए-विलादत से बढ़े गी रहमतों की जिस घड़ी खैरात-ए-महशर में शहां! महरूम मत करना मुझे अपनी शफ़ाअत से तुम्हें मालूम क्या भाई! खुदा का कौन है मक़बूल किसी मोमिन को मत देखो कभी तुम हक़ारत से उजाला ही उजाला होगा उसकी क़ब्र के अंदर हो जिस का दिल मुनव्वर उल्फत-ए-मेहर-ए-रिसालत से करम से अत्तार जिस दम जा रहा होगा शयातीन देखते होंगे सभी मुर मुर के हसरत से