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Mere Khwab Mein Aa Bhi Ja Ghous-e-Azam

Written by Muhammad Ilyas Attar Qadri

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मेरे ख़्वाब में आ भी जा ग़ौस-ए-आज़म पिला जाम-ए-दीदार या ग़ौस-ए-आज़म कभी तो ग़रीबों के घर कोई फेरा! हमारी भी क़िस्मत जगा ग़ौस-ए-आज़म कुछ ऐसी पिला दो शराब-ए-मोहब्बत न उतरे कभी भी नशा ग़ौस-ए-आज़म हैं ज़ेर-ए-क़दम गर्दनें औलिया की तुम्हारा है वो मर्तबा ग़ौस-ए-आज़म हैं सारे वली तेरे ज़ेर-ए-नगीं और है तू सय्यद-उल-औलिया ग़ौस-ए-आज़म मदद कीजिये आह! चारों तरफ से मैं आफ़ात में हूँ घिरा ग़ौस-ए-आज़म बहार आए मेरे भी उजड़े चमन में चला कोई ऐसी हवा ग़ौस-ए-आज़म रहे शाद-ओ-आबाद मेरा घराना करम अज़ पये-ए-मुस्तफ़ा ग़ौस-ए-आज़म दम-ए-नज़अ शैतान न ईमान ले ले हिफ़ाज़त की फ़र्मा दुआ ग़ौस-ए-आज़म मुरीदीन की मौत तौबा पे होगी है ये आप ही का कहा ग़ौस-ए-आज़म मरी मौत भी आए तौबा पे मुर्शद! हूँ मैं भी मुरीद-ए-आप का ग़ौस-ए-आज़म करम आप का गर हुआ तो यक़ीनन न होगा बुरा ख़ात्मा ग़ौस-ए-आज़म मरी क़ब्र में "ला तख़फ़" कहते आओ अंधेरा रहा है डरा ग़ौस-ए-आज़म गो अत्तार बद है बदों का भी सरदार ये तेरा है तेरा, तेरा ग़ौस-ए-आज़म