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मिटा दे सारी खताएं मेरी मिटा या रब

Written by Muhammad Ilyas Attar Qadri

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मिटा दे सारी खताएं मेरी मिटा या रब बना दे नेक बना नेक दे बना या रब बना दे मुझको इलाही ख़ुलूस का पैकर क़रीब आये न मेरे कभी रिया या रब अंधेरी क़ब्र का दिल से नहीं निकलता डर करूँगा क्या जो तू नाराज़ हो गया या रब गुनाहगार हूँ मैं लायेक़-ए-जहन्नम हूँ करम से बख़्श दे मुझको न दे सज़ा या रब बुराइयों पे पशेमां हूँ रहम फ़रमा दे है तेरे क़हर पे हावी तेरी अता या रब मुहीत-ए-दिल पे हुआ हाय नफ़्स-ए-अम्मारा दिमाग़ पर मेरे इब्लीस छा गया या रब रिहाई मुझको मिले काश! इन्स-ओ-शैतां से तेरे हबीब का देता हूँ वास्ता या रब गुनाह बे-अदद और जुर्म भी ला-तदाद मुआफ़ कर दे न सह पाऊंगा सज़ा या रब मैं कर के तौबा पलट कर गुनाह करता हूँ हक़ीक़ी तौबा का कर दे शरफ़ अता या रब सुनूं न फ़ुहश कलामी न ग़ीबत-ओ-चु़ग़ली तेरी पसंद की बातें फ़क़त सुना या रब करें न तंग ख़यालात-ए-बद कभी, कर दे शऊर-ओ-फ़िक्र को पाकीज़गी अता या रब नहीं है नामा-ए-अत्तार में कोई नेकी फ़क़त है तेरी ही रहमत का आसरा या रब