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Mujh Pe Chashm-e-Shifa Kijiye

Written by Muhammad Ilyas Attar Qadri

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मुझ पे चश्मे शफ़ा कीजिये दूर बारे गुनाह कीजिये आह! इसयाँ की तुग़्यानियाँ अब मदद नाख़ुदा कीजिये हो गया क़ल्ब हाए सियाह लुत्फ़े नूर-ए-ख़ुदा कीजिये कोशिशों से भी छूटते नहीं इन गुनाहों का क्या कीजिये हाए इसयाँ ने तोड़ी कमर कुछ मेरा, मुस्तफ़ा कीजिये माल के जाल में फँस गया मुझ को आक़ा रहा कीजिये बारे इसयाँ तले दब गया आप आकर खड़ा कीजिये दर्दे इसयाँ से मुझ को शफ़ा ऐ मसीहा! अता कीजिये क़ल्बे पत्थर से भी सख़्त है इस को नरमी अता कीजिये चारा गर छोड़ कर चल दिये चारा ला दवा कीजिये जगमगा दे क़ल्बे सियाह लुत्फ़े बदरुद्दुजा कीजिये अब गुनाहों की आदत छूटे चश्मे रहमत शहा कीजिये अब करम सोये ख़स्ता जिगर शाहे अर्ज़ ओ समा कीजिये चाँद चेहरा उठाऊँ, सोये दिल इक इशारा ज़रा कीजिये हुब्बे दुनिया की मस्ती सवार हो गई कुछ मेरा कीजिये चश्मे रहमत हबीबे ख़ुदा सोये बे दस्त ओ पा कीजिये या नबी! आप ही कुछ इलाज नफ़्स ओ शैतान का कीजिये राह भूला कारवाँ रहबरी रहनुमा कीजिये दीन पर इस्तक़ामत अता अज़ तुफ़ैले रज़ा कीजिये मिस्ले बिस्मिल तड़पता रहूँ दर्द ऐसा अता कीजिये सुन्नतों की बहारें अता या हबीबे ख़ुदा कीजिये भाइयो! गर सुकून चाहिये सुन्नतों पर चला कीजिये दीन के वास्ते देखे वक़्त आख़िरत का भला कीजिये सुन्नतें सीखने के लिये क़ाफ़िलों में चला कीजिये चाहते हो कि राज़ी हो रब्बे मुस्तफ़ा का कहा कीजिये उन की यादों में खो जाये मुस्तफ़ा मुस्तफ़ा कीजिये मुझ को आक़ा अता अपना इश्क़ और ख़ौफ़े ख़ुदा कीजिये अहले ईमान को फ़ैज़ से पाक मुस्तफ़ा कीजिये हो ख़ज़ाँ दूर आये बहार दिल का गुलशन हरा कीजिये काश! अत्तार की मग़फ़िरत हो करम सरवरा कीजिये