मुरादें मिल रही हैं शाद शाद उन का सवाली है
लबों पे इल्तिजा है रौज़ा की जाली है
तेरी सूरत तेरी सीरत ज़माने से निराली है
तेरी हर हर अदा प्यारे दलील-ए-बे मिसाली है
बशर हो या मलक जो है तेरे दर का सवाली है
तेरी सरकार वाला है तेरा दरबार-ए-आली है
वह जग दाता हो तुम संसार सारे का सवाली है
दिया करना कि इस मुंगते ने भी गुड़ड़ी बिछा ली है
मुनव्वर दिल नहीं फ़ैज़-ए-क़ुदूम-ए-शाह से रौज़ा है
मुशब्बक सीना-ए-आशिक़ नहीं रौज़ा की जाली है
तुम्हारा क़ामत-ए-यकता है इक बज़्म-ए-वहदत का
तुम्हारी ज़ात-ए-बे हमता मिसाल-ए-बे मिसाली है