नहीं मेरे अच्छे अमल ग़ौस-उल-आज़म
मगर तुम पे रखता हूँ बल ग़ौस-उल-आज़म
तेरा दामन-ए-पाक मुझ से न छूटा
ये है उम्र का मा-हसल ग़ौस-उल-आज़म
हुसैन-ओ-हसन फूल बाग़-ए-नबी के
उसी बाग़ का तू है फल ग़ौस-उल-आज़म
है क़ौल-ए-ख़िज़्र ये कि सब औलिया में
नहीं कोई तेरा बदल ग़ौस-उल-आज़म
भिकारी तेरे शम्स-ओ-ज़ोह्रह अतआरिद
गदा मुश्तरी-ओ-ज़ुहल ग़ौस-उल-आज़म
तेरे नाम का जो भी तावीज़ बांधे
न हो उस को कोई ख़लल ग़ौस-उल-आज़म