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नहीं मेरे अच्छे अमल ग़ौस-उल-आज़म

Written by Maulana Muhammad Jamil-ur-Rehman Razvi

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नहीं मेरे अच्छे अमल ग़ौस-उल-आज़म मगर तुम पे रखता हूँ बल ग़ौस-उल-आज़म तेरा दामन-ए-पाक मुझ से न छूटा ये है उम्र का मा-हसल ग़ौस-उल-आज़म हुसैन-ओ-हसन फूल बाग़-ए-नबी के उसी बाग़ का तू है फल ग़ौस-उल-आज़म है क़ौल-ए-ख़िज़्र ये कि सब औलिया में नहीं कोई तेरा बदल ग़ौस-उल-आज़म भिकारी तेरे शम्स-ओ-ज़ोह्रह अतआरिद गदा मुश्तरी-ओ-ज़ुहल ग़ौस-उल-आज़म तेरे नाम का जो भी तावीज़ बांधे न हो उस को कोई ख़लल ग़ौस-उल-आज़म