पाओगे बख़्शिशें क़ाफ़िले में चलो
Written by Muhammad Ilyas Attar Qadri
पाओगे बख़्शिशें क़ाफ़िले में चलो, जन्नतें भी मिलें, क़ाफ़िले में चलो
रिज़्क़ के दर खुलें, क़ाफ़िले में चलो, बरकतें भी मिलें, क़ाफ़िले में चलो
ज़ख़्म बड़े, फोड़े, फुंसी, मिटें, गर हों मसे, झड़ें, क़ाफ़िले में चलो
काले यरक़ान में, क्यों परेशान हैं, पाएंगे सेहतें, क़ाफ़िले में चलो
टेढ़ी हों हड्डियां, होंगी सीधी मियां, दर्द सारे मिटें, क़ाफ़िले में चलो
दर्द-ए-गंभीर हो, कोई दिलगीर हो, होंगी हल मुश्किलें, क़ाफ़िले में चलो
गरचह बीमारियां, हों कहीं पथरियां, पाओगे सेहतें, क़ाफ़िले में चलो
तंगदस्ती हो घर में या नाचाक़ियां, आएंगी बरकतें, क़ाफ़िले में चलो
जो के मफ़क़ूद हो वो भी मौजूद हो, इन शा अल्लाह चलें, क़ाफ़िले में चलो
दूर होंगे अलम, होगा रब का करम, ग़म के मारे सुनें, क़ाफ़िले में चलो
सर में दर्द हो, अगर दुख रही हो कमर, दर्द दोनों मिटें, क़ाफ़िले में चलो
बाप बीमार हो, सख़्त बेज़ार हो, पाएगा सेहतें, क़ाफ़िले में चलो
मां जो बीमार हो, या वो नाचार हो, रंज-ओ-ग़म मत करें, क़ाफ़िले में चलो
वाले हो बाब-ए-करम, दूर हों रंज-ओ-ग़म, फिर से ख़ुशियां मिलें, क़ाफ़िले में चलो