Home/Mustafa Raza Khan Qadri/Payam le ke jo aayi saba madine se

पैगाम ले के जो आई सबा मदीने से

Written by Mustafa Raza Khan Qadri

100%
पयाम ले के जो आई सबा मदीने से मरीज़-ए-इश्क़ की लाई दवा मदीने से सुनो तो ग़ौर से आई सदा मदीने से क़रीं है रहमत-ए-फ़ज़्ल-ए-ख़ुदा मदीने से मिले हमारे भी दिल को जला मदीने से के मेहर-ओ-माह ने पाई ज़िया मदीने से तुम्हारी एक झलक ने किया उसे दिलकश फ़रोग़-ए-हुस्न ने पाया शिहा मदीने से तमाम शाह-ओ-गदा पल रहे हैं उस दर से मिली जहान को रोज़ी सदा मदीने से जो आया ले के गया कौन लौटा ख़ाली हाथ बतादे कोई सुना हो जो 'ला' मदीने से बतादे कोई और से भी कुछ पाया जिसे मिला जो मिला वो मिला मदीने से वो आया ख़ुल्द में जो आ गया मदीने में गया वो ख़ुल्द से जो चल दिया मदीने से न चैन पाए गा ये ग़मज़दा किसी सूरत मरीज़-ए-ग़म को मिले गी शफ़ा मदीने से लगाओ दिल को न दुनिया में हर किसी शय से तअल्लुक़ अपना हो का'बे से या मदीने से गदा की राह जहाँ देखें फिर नवा क्यूँ हो नवा से पहले मिले बे-नवा मदीने से चमन के फूल खिले मुर्दा दिल भी जी उठे नसीम-ए-ख़ुल्द से आई है या मदीने से करे गी मुर्दों को ज़िंदा ये तिशनों को सैराब वो देखो उठी करम की घटा मदीने से मदीना चश्मा-ए-आब-ए-हयात है यारो चलो हमेशा की ले लो बक़ा मदीने से फ़ज़ा-ए-ख़ुल्द के क़ुर्बान मगर वो बात कहाँ मिल आएं हज़रत-ए-रिज़वान ज़रा मदीने से हमारे दिल को तो भाया है तैबा ही ज़ाहिद तुम्हें है मक्का तो होगा सवा मदीने से चले जो तैबा से मुस्लिम तो ख़ुल्द में पहुँचे के सीधा ख़ुल्द का है रास्ता मदीने से तुम एक आन में आए गए तुम्हारे लिए दो गाम भी नहीं अर्श-ए-अला मदीने से तुम्हारे क़दमों पे सदक़े जाँ फ़िदा होजाए न लाए फिर मुझे मेरा ख़ुदा मदीने से तेरे हबीब का प्यारा चमन किया बर्बाद इलाही निकले ये नज्दी बला मदीने से तेरे नसीब का नूरी मिले गा तुझ को भी ले आए हिस्सा ये शाह-ओ-गदा मदीने से