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क़ाफ़िले ने सूए तैयबा कमर आराई की

Written by Imam Ahmad Raza Khan Qadri

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क़ाफ़िले ने सूए तैयबा कमर आराई की मुश्किल आसान इलाही मेरी तन्हाई की लाज रख ली तमा-ए-अफ़व के सौदाई की ऐ मैं क़ुरबान मेरे आक़ा बड़ी आक़ाई की फ़र्श ता अर्श सब आईना ज़मा-इर हाज़िर बस क़सम खाइए उतरी तेरी दानाई की शश जहत सिमत-ए-मुक़ाबिल शब-ओ-रोज़ एक ही हाल धूम वन्नज्म में है आप की बीनाई की पाँच सौ साल की राह ऐसी है जैसे दो गाम आस हम को भी लगी है तेरी सुनवाई की चाँद इशारे का हिला हुक्म का बाँधा सूरज वाह क्या बात शहा तेरी तवानाई की तंग ठहरी है रज़ा जिस के लिए वुसत-ए-अर्श बस जगह दिल में है उस जलवा-ए-हरजाई की