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क़हत साली टले, फ़स्ल फूले फले

Written by Muhammad Ilyas Attar Qadri

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क़हत साली टले, फ़स्ल फूले फले, ख़ूब हों बारिशें, क़ाफ़िले में चलो क़ाफ़िले में ज़रा, मांगो आकर दुआ, पाओगे नेअमतें, क़ाफ़िले में चलो छोड़ें बे-नोशियां मत बकें गालियां, आएं तौबा करें, क़ाफ़िले में चलो ऐ शराबी तू आ, आ जुआरी तू आ, छूटें बद आदतें, क़ाफ़िले में चलो होगा लुत्फ़े-ख़ुदा, आओ भाई दुआ, मिल के सारे करें, क़ाफ़िले में चलो दूर बीमारियां और परेशानियां, होंगी बस चल पड़ें, क़ाफ़िले में चलो अल्सर और कैंसर अब या हो दर्दे-कमर, चलिए हिम्मत करें, क़ाफ़िले में चलो दर्द गरचे तुम्हारे में है, दर्से-फ़ारूक़ दें, क़ाफ़िले में चलो फ़ायदा आख़िरत के बनाने में है, सब मुबल्लिग़ कहें, क़ाफ़िले में चलो कहते अत्तार हैं, जो मेरे यार हैं, वह हर एक से कहें, क़ाफ़िले में चलो