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रौनक-ए-कुल औलिया या गौस-ए-आज़म दस्तगीर

Written by Muhammad Ilyas Attar Qadri

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रौनक-ए-कुल औलिया या गौस-ए-आज़म दस्तगीर पेशवा-ए-असफिया या गौस-ए-आज़म दस्तगीर आप हैं पीरों के पीर और आप हैं रोशन ज़मीर आप शाह-ए-अतकिया या गौस-ए-आज़म दस्तगीर औलिया की गर्दनें हैं आप के ज़ेर-ए-क़दम या इमाम-उल-औलिया या गौस-ए-आज़म दस्तगीर थरथराते हैं शहा जिन्नात तेरे नाम से है तेरा वो दبدबा या गौस-ए-आज़म दस्तगीर पैदा होते ही रखे रमज़ान में रोज़े, दिन में दूध का ना एक क़तरा पिया या गौस-ए-आज़म दस्तगीर जिस तरह मुर्दे जलाए उस तरह मुर्शिद मेरे मुर्दा दिल को भी जला, या गौस-ए-आज़म दस्तगीर अहल-ए-महशर देखते ही हशर में यूँ बोल उठे मरहबा सद मरहबा या गौस-ए-आज़म दस्तगीर आप जैसा पीर हो तो क्या ग़रज़ दर-दर फिरूँ आप से सब कुछ मिला या गौस-ए-आज़म दस्तगीर गो ज़लील-ओ-ख़्वार हूँ बदकार-ओ-बदकिरदार हूँ आप का हूँ आप का, या गौस-ए-आज़म दस्तगीर रास्ता पुर-ख़ार, मंज़िल दूर, बन सुनसान है अल-मदद ऐ रहनुमा! या गौस-ए-आज़म दस्तगीर गौस-ए-आज़म! आइए मेरी मदद के वास्ते दुश्मनों में हूँ घिरा या गौस-ए-आज़म दस्तगीर आफ़तें भी दूर हों, रंज-ओ-बला काफ़ूर हों अज़ तुफ़ैल-ए-मुस्तफ़ा या गौस-ए-आज़म दस्तगीर इज़्न्-ए-दो बग़दाद का हर एक अक़ीदत-मंद को ग्यारहवीं वाले शहा या गौस-ए-आज़म दस्तगीर बैठे मुर्शिद हाज़िरी को एक ज़माना हो गया दर पे फिर मुझ को बुला, या गौस-ए-आज़म दस्तगीर मेरे मीठे मीठे मुर्शिद आइए ना ख़्वाब में वास्ता सरकार का, या गौस-ए-आज़म दस्तगीर अपनी उल्फ़त की पिला कर मै मुझे या मुर्शिदी मस्त और बेख़ुद बना या गौस-ए-आज़म दस्तगीर लमहा लमहा बढ़ रहा है हाय! इस्यान का मरज़ दीजिए मुझ को शिफ़ा, या गौस-ए-आज़म दस्तगीर मुर्शिदी मुझ को बना दे तू मरीज़-ए-मुस्तफ़ा अज़ पये अहमद रज़ा, या गौस-ए-आज़म दस्तगीर अपने रब से मुस्तफ़ा का ग़म दिला दे मुर्शिदी हाथ उठा कर दुआ या गौस-ए-आज़म दस्तगीर अब सरहाने आओ मुर्शिद और मुझे कलमा पढ़ाओ दम लबों पर आ गया या गौस-ए-आज़म दस्तगीर है यही अत्तार की हाजत मदीने में मरे हो इनायत-ए-सय्यदा, या गौस-ए-आज़म दस्तगीर