रौनक-ए-कुल औलिया या गौस-ए-आज़म दस्तगीर
पेशवा-ए-असफिया या गौस-ए-आज़म दस्तगीर
आप हैं पीरों के पीर और आप हैं रोशन ज़मीर
आप शाह-ए-अतकिया या गौस-ए-आज़म दस्तगीर
औलिया की गर्दनें हैं आप के ज़ेर-ए-क़दम
या इमाम-उल-औलिया या गौस-ए-आज़म दस्तगीर
थरथराते हैं शहा जिन्नात तेरे नाम से
है तेरा वो दبدबा या गौस-ए-आज़म दस्तगीर
पैदा होते ही रखे रमज़ान में रोज़े, दिन में दूध
का ना एक क़तरा पिया या गौस-ए-आज़म दस्तगीर
जिस तरह मुर्दे जलाए उस तरह मुर्शिद मेरे
मुर्दा दिल को भी जला, या गौस-ए-आज़म दस्तगीर
अहल-ए-महशर देखते ही हशर में यूँ बोल उठे
मरहबा सद मरहबा या गौस-ए-आज़म दस्तगीर
आप जैसा पीर हो तो क्या ग़रज़ दर-दर फिरूँ
आप से सब कुछ मिला या गौस-ए-आज़म दस्तगीर
गो ज़लील-ओ-ख़्वार हूँ बदकार-ओ-बदकिरदार हूँ
आप का हूँ आप का, या गौस-ए-आज़म दस्तगीर
रास्ता पुर-ख़ार, मंज़िल दूर, बन सुनसान है
अल-मदद ऐ रहनुमा! या गौस-ए-आज़म दस्तगीर
गौस-ए-आज़म! आइए मेरी मदद के वास्ते
दुश्मनों में हूँ घिरा या गौस-ए-आज़म दस्तगीर
आफ़तें भी दूर हों, रंज-ओ-बला काफ़ूर हों
अज़ तुफ़ैल-ए-मुस्तफ़ा या गौस-ए-आज़म दस्तगीर
इज़्न्-ए-दो बग़दाद का हर एक अक़ीदत-मंद को
ग्यारहवीं वाले शहा या गौस-ए-आज़म दस्तगीर
बैठे मुर्शिद हाज़िरी को एक ज़माना हो गया
दर पे फिर मुझ को बुला, या गौस-ए-आज़म दस्तगीर
मेरे मीठे मीठे मुर्शिद आइए ना ख़्वाब में
वास्ता सरकार का, या गौस-ए-आज़म दस्तगीर
अपनी उल्फ़त की पिला कर मै मुझे या मुर्शिदी
मस्त और बेख़ुद बना या गौस-ए-आज़म दस्तगीर
लमहा लमहा बढ़ रहा है हाय! इस्यान का मरज़
दीजिए मुझ को शिफ़ा, या गौस-ए-आज़म दस्तगीर
मुर्शिदी मुझ को बना दे तू मरीज़-ए-मुस्तफ़ा
अज़ पये अहमद रज़ा, या गौस-ए-आज़म दस्तगीर
अपने रब से मुस्तफ़ा का ग़म दिला दे मुर्शिदी
हाथ उठा कर दुआ या गौस-ए-आज़म दस्तगीर
अब सरहाने आओ मुर्शिद और मुझे कलमा पढ़ाओ
दम लबों पर आ गया या गौस-ए-आज़म दस्तगीर
है यही अत्तार की हाजत मदीने में मरे
हो इनायत-ए-सय्यदा, या गौस-ए-आज़म दस्तगीर