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Tajalli-e-Noor-e-Qadam Ghaus-e-Azam

Written by Mustafa Raza Khan Qadri

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तजल्ली-ए-नूर-ए-क़दम ग़ौस-ए-आज़म ज़िया-ए-सिराजुज़-ज़ुलम ग़ौस-ए-आज़म तराहल है तेरा हरम ग़ौस-ए-आज़म अरब तेरा तेरा अज़म ग़ौस-ए-आज़म करम आप का है अअम ग़ौस-ए-आज़म इनायत तुम्हारी अतअम ग़ौस-ए-आज़म मुखालिफ़ हों गो सुवदम ग़ौस-ए-आज़म हमें कुछ नहीं इस का ग़म ग़ौस-ए-आज़म चला ऐसी तेग़-ए-दो दम ग़ौस-ए-आज़म कि आ'दा के सर हों क़लम ग़ौस-ए-आज़म वो एक वार का भी न होगा तुम्हारे कहाँ है मुखालिफ़ में दम ग़ौस-ए-आज़म तेरे होते हम पर सितम ढाएँ दुश्मन सितम है सितम है सितम ग़ौस-ए-आज़म कहाँ तक सुनें हम मुखालिफ़ के ता'ने कहाँ तक सहें हम सितम ग़ौस-ए-आज़म बढ़े हौसले दुश्मनों के घटा दे ज़रा ले ले तेग़-ए-दो दम ग़ौस-ए-आज़म नहीं लाता ख़ातिर में शाहों को शाहा तेरा बंदा-ए-बे-दिरम ग़ौस-ए-आज़म करम चाहिए तेरा तेरे ख़ुदा का करम ग़ौस-ए-आज़म करम ग़ौस-ए-आज़म घटा हौसला ग़म की काली घटा का बढ़ी है घटा दम-ब-दम ग़ौस-ए-आज़म बढ़ा नाख़ुदा सर से पानी अलम का ख़बर लीजे डूबे हम ग़ौस-ए-आज़म करो पानी ग़म को बहा दो अलम को घटाएँ बढ़ें हो करम ग़ौस-ए-आज़म नज़र आए मुझ को न सूरत अलम की न देखूँ कभी रूये ग़म गौस-ए-आज़म बढ़ा हाथ कर दस्तगीरी हमारी बढ़ा अब्र-ए-ग़म दम-ब-दम गौस-ए-आज़म ख़ुदारा ज़रा हाथ सीने पे रख दो अभी मिटते हैं ग़म-ए-अलम गौस-ए-आज़म ख़ुदा ने तुम्हें मह्व-ओ-इसबात बख़्शा हो सुल्तान-ए-लौह-ओ-क़लम गौस-ए-आज़म है क़िस्मत मेरी टेढ़ी तुम सीधी कर दो निकल जाएँ सब पेच-ओ-खम गौस-ए-आज़म ख़बर लो हमारी कि हम हैं तुम्हारे करो हम पे फ़ज़्ल-ओ-करम गौस-ए-आज़म तुम ऐसे ग़रीबों के फ़रियाद रस हो कि ठहरा तुम्हारा अलम गौस-ए-आज़म बि-ऐनी इनायत ब-चश्म-ए-करामत बदह ज़रआ ना-चश्म गौस-ए-आज़म तेरा एक क़तरा अवालिम नुमा है नहीं चाहिए जाम-ए-जम गौस-ए-आज़म कुछ ऐसा गुमा दे मोहब्बत में अपनी कि ख़ुद कह उठूँ मैं मनम गौस-ए-आज़म जिसे चाहे जो दे जिसे चाहे न दे तेरे हाथ में है नि'अम गौस-ए-आज़म तेरा हुस्न-ए-नमकीं भरे ज़ख़्म-ए-दिल के बनह मरहम-ए-रुख़ दिलम गौस-ए-आज़म तरक़्क़ी करे रोज़-ओ-शब दर्द-ए-उल्फ़त न हो क़ल्ब का दर्द कम गौस-ए-आज़म ख़ुदा रखे तुम को हमारे सरों पर है बस इक तुम्हारा ही दम गौस-ए-आज़म दम-ए-नज़'अ सरहाने आ जाओ प्यारे तुम्हें देख कर निकले दम गौस-ए-आज़म तरी दीद के शौक़ में जान-ए-जानाँ खेंच आया है आँखों में दम गौस-ए-आज़म कोई दम के मेहमाँ हैं आ जाओ उस दम कि सीने में अटका है दम गौस-ए-आज़म दम-ए-नज़'अ आओ कि दम आए दम में करो हम पे यिस दम गौस-ए-आज़म ये दिल ये जिगर है ये आँखें ये सर है जहाँ चाहो रखो क़दम गौस-ए-आज़म सर-ए-ख़ुद ब-शमशीर-ए-अब्रू फ़रोशम ब-मिज़गाँ तू सीना उम्म गौस-ए-आज़म ब-पैकान-ए-तीरत जिगरी फ़रोशम ब-तीर-ए-निगाहद दिलम गौस-ए-आज़म दिमाग़ रसद बर सर-ए-अर्श-ए-आला बपायीत अगर सर नहम ग़ौस-ए-आज़म मेरी सर-बुलंदी यहीं से है ज़ाहिर के शुद ज़ेर-ए-पायीत सरम ग़ौस-ए-आज़म लगा लो मेरे सर को क़दमों से अपने तुम्हें सर-ए-हक़ की क़सम ग़ौस-ए-आज़म क़दम क्यों लिया औलिया ने सरों पर तुम्हें जानो इस के हकम ग़ौस-ए-आज़म क्या फ़ैसला हक़ ओ बातिल में तुम ने किया हक़ ने तुम को हकम ग़ौस-ए-आज़म तुम्हारी महक से गली कूचे महके है बग़दाद रश्क-ए-इरम ग़ौस-ए-आज़म करम से किया रह-नुमा रहज़नों को इधर भी निगाह-ए-करम ग़ौस-ए-आज़म मेरा नफ़्स-ए-सरकश भी रहज़न है मेरा यह देता है दम दम-ब-दम ग़ौस-ए-आज़म दिखा दे तो इन्नी उज़ूम के जलवे सुना दे सदा-ए-मनम ग़ौस-ए-आज़म मेरे दम को उस के दमों से बचा दे करम कर करम कर करम ग़ौस-ए-आज़म मैं हूँ नातवाँ सख़्त कमज़ोर हद का हैं ज़ोरों चढ़े उस के दम ग़ौस-ए-आज़म ना पल्ला हो हल्का हमारा ना हम हों ना बिगड़े हमारा भरम ग़ौस-ए-आज़म कहाँ तक हमारी खताएं गिनें गे करें अफ़ु सब यक-क़लम ग़ौस-ए-आज़म हमारी ख़ताओं से दफ़्तर भरे हैं करम कर के हों काल-अदम ग़ौस-ए-आज़म तुम्हारे करम का है नूरी भी प्यासा मिले यम से इस को भी नम ग़ौस-ए-आज़म