तारीख़-ए-तब्अ अज़ सय्यद वाहिद अली साहिब रिज़वी बरेलवी
शागिर्द-ए-हज़रत-ए-मुसन्नफ़
मेरे उस्ताद-ए-मुअज़्ज़म का छपा मज्मूआ
जिस के हर शेर से इश्क़-ए-नबवी है ताबां
तब्अ के साल की जब फ़िक्र हुई वाहिद को
बोला हातिफ़ कि लिखो दफ़्तर-ए-नूर-ए-अरफ़ां
तारीख़-ए-तब्अ अज़ सूफ़ी अहमद साहिब रिज़वी बरेलवी
शागिर्द-ए-हज़रत-ए-मुसन्नफ़
मेरे उस्ताद का छपा वह कलाम
जिस का मुद्दत से दिल में था अरमान
तब्अ का सन अज़ीज़ रिज़वी ने
लिख दिया दफ़्तर-ए-गौहर अफ़्शां